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अभिनव प्रयोगः आयत, वर्ग और त्रिभुज समझाने के लिए प्राथमिक स्कूल में बनाया गणित गार्डन

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चोखापुर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में गणित समझाने के लिए स्कूल परिसर में इस तरह से फर्स पर बनीं है? - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। प्रधानाध्यापक मुनीष कुमार की मेहनत के बूते सात वर्ष में प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी की तस्वीर बदल गई। परिसर पब्लिक स्कूल की तरह दिखता है। छात्र संख्या बढ़कर 42 से 114 हो गई। शिक्षकों, शिक्षामित्र की मेहनत और लगन से विद्यालय में पढ़ाई के स्तर को भी सुधारा है। खंड शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी अब इस स्कूल में की मिसाल देकर दूसरे स्कूलों को संवारने में लगे हैं।
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चोखापुरी के इस स्कूल को जिलाधिकारी पुलकित खरे के हाथों बृहस्पतिवार को स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। विद्यालय को सजाने संवारने से लेकर पढ़ाई के स्तर को सुधारने में मुनीष कुमार का अहम योगदान है। उनकी तैनाती इस विद्याल में 05 नवंबर 2015 को हुई थी। तब विद्यालय में छुट्टा पशु घूमा करते थे। बारिश में भवन की छत से टपकती थी। बच्चों की संख्या सिर्फ 42 थी। पढ़ाने के लिए मुनीष कुमार के साथ शिक्षामित्र बृजबाला थीं। पांच कक्षाएं और अकेला शिक्षक, साथ देने के लिए शिक्षामित्र। कम शिक्षक होने की बात कह करके विद्यालय को उसके हाल पर छोड़ा जा सकता था लेकिन मुनीष कुमार ने ऐसा नहीं किया। विद्यालय को संवारने में उन्होंने अपने वेतन से 50 हजार रुपये खर्च किए। इसके बाद कायाकल्प योजना का साथ मिला।
धीरे-धीरे विद्यालय की तस्वीर बदलती चली गई। विद्यालय परिसर के फर्स पर गणित गार्डन बनाया गया। आयत, वर्ग, त्रिभुज और कोणों के प्रकार समझाने के लिए यह कारगर साबित हुआ। खंड शिक्षा अधिकारी विजय वीरेंद्र सिंह ने 29 जून को विद्यालय में यह मॉडल देखा तो वह तारीफ किए बगैर नहीं रह सके। उन्होंने कहा कि जब प्रधानाध्यापकों की ब्लॉक स्तरीय बैठक हो तो उसमें अपनी प्रस्तुति दें और विद्यालय परिसर की वीडियो भी दिखाएं, ताकि दूसरे विद्यालयों में इसे दिखाकर सुधार कराया जा सके।
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बदलाव होने पर ग्रामीणों ने मदद का हाथ बढ़ाया
जब विद्यालय की तस्वीर बदली तो गांव तथा आसपास के लोगों ने दान के लिए हाथ बढ़ाया। करीब 20 हजार रुपये का सहयोग मिला। जिन लोगों ने दान दिया है, उनके नाम भामाशाह बोर्ड बनाकर अंकित किए गए हैं। साथ ही बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए हर महीने टेस्ट लेकर माह के सितारे घोषित किए जाते हैं। बच्चों के फोटो उनके नाम के साथ बोर्ड पर चस्पा किए जाते हैं, जिसे देखकर दूसरे बच्चे भी प्रोत्साहित होते हैं।
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