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मगरमच्छ के मुंह से खींचकर बचाई महिला की जान

Thu, 27 Aug 2015 11:16 PM IST
Madotanda
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चूका के पास शारदा नहर के पास जंगल में शौच को गई 45 वर्षीय फूलमाला पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया। वह फूलमाला को अपने मुंह में दबाकर नहर में काफी दूर तक ले गया। पति व अन्य महिलाओं के शोर मचाने पर गांव के लोग नाव लेकर पहुंचे और मगरमच्छ पर वार करके फूलमाला को छुड़ाकर जान बचाई। करीब एक घंटे तक मगरमच्छ के जबड़े में दबी रही फूलमाला के शरीर के एक हिस्सा का मांस तो बुरी तरह नुच ही गया, हाथ की हड्डी और दो पसली टूटने के साथ ही सीने में खून जम गया है। इससे हालत गंभीर होने के कारण फूलमाला को बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में वेंटीलेटर पर रखकर डॉक्टर जान बचाने में जुटे हुए हैं।
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फूलमाला मटैइया लालपुर गांव की रहने वाली है। यहां की महिलाओं को शौच के लिए गांव से करीब चार सौ मीटर दूर बंधे पार जाना पड़ता है। बुधवार शाम को जब पांच महिलाएं वहां गईं तो अंधेरा होने के कारण फूलमाला का पति प्रफुल्ल विश्वास भी साथ गया था। फूलमाला के भतीजे मोतीलाल ने बताया कि मगरमच्छ फूलमाला का दाहिना हाथ अपने जबड़े में दबाने के बाद खींचता हुआ पानी में ले गया। इस पर पति प्रफुल्ल ने गांव के कुछ लोगों को बुलाया तो वे नाव लेकर पहुंच गए। प्रफुल्ल व अन्य लोग पीछा करते हुए मगरमच्छ तक पहुंच गए। तेज धार के बीच उन लोगों पर मगरमच्छ पर हमला करने के लिए सिर्फ नाव की पतवार थी, उसी से मगरमच्छ पर हमले किये तो उसने फूलमाला को छोड़ दिया। इसके बाद वे लोग फूलमाला को पीलीभीत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, हालत गंभीर देखकर रात में ही उसे बरेली रेफर कर दिया गया।
बृहस्पतिवार दोपहर हालत गंभीर बताए जाने पर परिवार वाले फूलमाला को स्टेेडियम रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए। वहां के डॉ. सौरभ गोयल ने बताया कि फूलमाला के सीने में खून जम गया है, उसे टेस्ट ट्यूब डालकर निकाला जा रहा है। साथ ही उसके खून की कमी भी हो गई है। सांस लेने में भी काफी दिक्कत हो रही है। फिलहाल वेंटीलेटर से कृत्रिम सांसे देकर डॉक्टर पूरी कोशिश में जुटे हुए हैं। परिवार वाले भी बस दुआएं ही कर रहे हैं।
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तराई में मुसीबत से कम नहीं हैं मगरमच्छ
नदी, नहर व तालाबों के बहुतायत वाले तराई के इस जिले में मगरमच्छ किसी मुसीबत से कम नहीं हैं। अक्सर इनके पानी से बाहर आने और लोगों पर हमले करने की घटनाएं होती हैं।
जनपद में देवहा, शारदा, गोमती, माला, खन्नौत, खकरा सहित एक दर्जन नदियां और इतनी ही नहरें हैं। इसके अलावा सैकड़ों तालाब हैं। लगभग इन सभी नदियों में मगरमच्छ पाए जाते हैं। खास बात यह है कि बाढ़ के दौरान बड़ी नदियों से निकल ये मगरमच्छ नहरों व नालों तक में पहुंच जाते हैं। पानी कम होने पर ये वापस बड़ी नदियों में नहीं पहुंच पाते और उन्हीं नाले व नहरों में अपनी दिनचर्या शुरू कर देते हैं। नहरों व तालाबों में जब तक इन्हें मछली समेत अन्य शिकार आसानी से मिलते रहते हैं तब तक यह शांत रहते हैं, लेकिन जैसे ही इन्हें भोजन की कमी खलती है वह सूखे पर अथवा नदी किनारे घात लगा वहां पानी पीने पहुंचे पशुओं से लेकर किसी कारण से तालाब किनारे पहुंचे मनुष्य तक पर हमला करने से नहीं चूकते। ऐसे तमाम तालाब व नाले हैं जहां कई बार इनकी आमद होती रहती है, लेकिन आबादी से सटे क्षेत्र में इनकी उपस्थिति लोगों के लिए समस्या बनी हुई है। शहर की बात करें तो चंदोई जाने वाले पर पड़ने वाली खकरा नदी के आसपास अक्सर मगरमच्छ निकलने की घटनाएं होती हैं। करीब डेढ़ माह पूर्व एक मगरमच्छ नदी से राहगीरों को निवाला बनाने के लिए निकलकर पुल पर आ गया था, लेकिन वहां काफी भीड़ जुट गई थी। लोगों की सूचना पर वन विभाग के लोगों ने मौके पर पहुंच उसे किसी तरह फिर पानी में पहुंचाया।  इसके अलावा 20 दिन पूर्व ही शहर के व्यस्ततम गौहनिया चौराहे के निकट माधोटांडा मार्ग पर छह फिट लंबा एक मगरमच्छ सुबह पांच बजे आ गया। यह माधोटांडा रोड स्थित नाले से निकल कर आया था। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने बमुश्किल उसे पक माला नदी में छोड़ा था। 21 जूून को माधोटांडा क्षेत्र में पशु चराते समय मगरमच्छ ने ककरौआ निवासी डालचंद्र पर हमला कर उसे निवाला बनाने का प्रयास किया था। इस हमले में उसका एक मगरमच्छ काट ले गया था।  लेकिन मगरमच्छ के हमले में अपना पैर गवां चुके डालचंद्र को अब तक सरकारी सहायता के नाम पर सिर्फ धक्के ही मिल रहे हैं। इससे कुछ दिन पूर्व रमनगरा क्षेत्र में शारदा सागर डैम में घास चरते समय एक गाय को मगरमच्छ अपना शिकार बना चुका है।
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