ब्रह्मचारी घाट पर दिनभर लगी रही भीड़
देवहा नदी में जलस्तर बढ़ने की जानकारी के बाद शहर के काफी लोग बृहस्पतिवार दोपहर ब्रह्मचारी घाट पहुंचे और पानी पर टकटकी लगाए रहे। शाम तक पानी बढ़ता गया है। हालांकि देर शाम तक शहर और आसपास कहीं जलभराव की स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकी है। राजस्व विभाग की टीम भी अलर्ट नजर आईं।
इन इलाकों में बढ़ा बाढ़ का खतरा
देवहा नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद शहर के मोहल्ला बेनी चौधरी, खकरा, डालचंद, फीलखाना के अलावा पकड़िया नौगवा, ईदगाह रोड और शहर से सटे मीरापुर, चंदोई, नावकूड़, बेहरी गांव आदि स्थानों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
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55 हजार क्यूसेक पर बिगड़ जाती है स्थिति
शहर से सटे इलाके से गुजरने वाली देवहा नदी में वैसे तो 35 हजार से अधिक पानी आने पर निचले इलाकों में जलभराव की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन 55 हजार क्यूसेक पानी पास होने के बाद स्थिति बिगड़ जाती है। पिछले साल आई बाढ़ के बाद देवहा नदी में 56 हजार क्यूसेक तक पानी पास हुआ था। जिसके बाद शहर के आधे हिस्से में जलभराव की स्थिति बदतर हो गई थी।
कैलाश नदी के उफनाने से मझोला-सितारगंज मार्ग कटा
पीलीभीत जिले में कैलाश नदी के उफनाने से मझोला-सितारगंज मार्ग उत्तराखंड की सीमा में कट गया। इससे आवागमन ठप हो गया। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार पिछले साल भी इसी जगह पर मार्ग पर कटा था। जिसके बाद उत्तराखंड सरकार की ओर से कटे स्थान पर पुलिया बनाने के साथ इंटर लॉकिंग कार्य कराया गया था। बृहस्पतिवार को पानी बढ़ने के बाद मार्ग कटने से करीब 15 गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
मझोला से सितारगंज जाने वाले मार्ग पर रोजाना हजारों लोग आवागम करते हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार पिछले साल बाढ़ के दौरान उत्तराखंड की सीमा में मार्ग कट गया था। जिसके बाद उत्तराखंड सरकार की ओर से मरम्मत कार्य के रूप में करीब छह पाइप डलवाकर पुलिया निर्माण कराने के बाद उसके ऊपर इंटरलॉकिंग कार्य कराया गया था। करीब दो माह तक आवागमन ठप रहा था। जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई थी।
इधर बृहस्पतिवार दोपहर बाद पहाड़ों पर हो रही बारिश के बाद क्षेत्र से गुजरने वाली कैलाश नदी का जलस्तर बढ़ गया। नदी ने पिछले साल काटे गए स्थान को निशाने पर लिया और धीरे-धीरे पाइप बहने से मार्ग कट गया। करीब बीस फुट दायरे में मार्ग कटने से आवागमन ठप हो गया। जानकारी पर क्षेत्रीय लोगों में हड़कंप गया है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार इस मार्ग से मझोला क्षेत्र के भिंडारा, मजगमी, कटईया, बिहरैनी समेत गांवों के लोगों का उत्तराखंड के लिए आना-जाना होता है।