कलीनगर। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में जल्द ही हाथियों की मौजूदगी देखने को मिलेगी। दुधवा के चार महावत हाथियों को लाने के लिए कर्नाटक रवाना हो गए हैं। दस दिन प्रशिक्षण लेने के बाद महावत हाथियों को पीलीभीत लाएंगे। कर्नाटक से चार हाथी आने हैं। उनके रखरखाव की व्यवस्था को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
पीलीभीत के जंगल में बाघ, तेंदुए के अलावा अन्य वन्यजीवों की संख्या काफी बेहतर है। जंगल और उससे बाहर के इलाके में बाघ की मौजूदगी भी लगातार बढ़ती जा रही है। इससे वन्यजीवों के साथ इंसानों की सुरक्षा भी जिम्मेदारों के लिए चुनौती बनी हुई है। कई बार आबादी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के चलते मानव वन्यजीव संघर्ष की भी स्थिति बन जाती है। हाथी न होने से बाघ की निगरानी करने में विभागीय को कई प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ता है। काफी इंतजार के बाद दुधवा से हाथियों के आने के पहुंचने पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया जाता है।
इसको देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने हाथियों की डिमांड शुरू की थी। शासन स्तर तक पत्राचार भी किए गए। शासन से मंजूरी के बाद कवायद पर अमल शुरू हुआ। पीटीआर प्रशासन के प्रस्ताव पर बजट को भी मंजूरी मिल गई। अफसरों के दल ने कर्नाटक पहुंचकर हाथियों की स्थिति को परखने के साथ चिह्नीकरण किया था।
हालांकि पूर्व में शासन ने हाथियों को लाने की जिम्मेदारी वन निगम के अधीन कर दी थी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दुधवा के चार महावत जो पीटीआर में रहेंगे। वे हाथियों को लाने के लिए 23 मई को कर्नाटक रवाना हो गए हैं। दस दिन प्रशिक्षण लेने के बाद महावत हाथियों को लेकर पीलीभीत पहुंचेंगे। महावत में राजेंद्र, पप्पू, सुरेश और अमित शामिल हैं।
कर्नाटक से आएंगे चार हाथी
कर्नाटक से चार हाथियों को लेने की प्रक्रिया है। एक हाथी अन्य जगह से लाया जाएगा। हाथियों के ठहरने के लिए भी माला रेंज में इंतजाम किए गए हैं। हाथियों के ठहरने, खाने के सभी इंतजाम अलग अलग किए जा रहे हैं।
‘कर्नाटक से हाथी लाने के लिए महावत रवाना हो गए हैं। कुछ दिन प्रशिक्षण लेने के बाद हाथियों को पीलीभीत लाया जाएगा।’
- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व