पीलीभीत। धान और सरसों की फसल पककर तैयार थी। फसल बेचते तो जेब में रुपये आते और धनतेरस के साथ दिवाली का त्योहार भी मनाते लेकिन फसलें बर्बाद हो गईं। महंगाई की मार पहले से है। ऐसे में किसानों का हाल बेहाल हो है। धनतेरस पर खरीदारी के लिए धन नहीं हैं। बैंकों का कर्ज चढ़ा है, उसे चुकाने के लिए किस्ते हैं। सरकारी मदद भी मिल पाएगी या नहीं? कितनी मिलेगी यह अभी नहीं कहा जा सकता है। अलबत्ता राज्य सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही शनिवार को जिले में बाढ़ से हुई क्षति का हवाई सर्वे कर चुके हैं। उनसे पहले जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र सिंह भी हवाई दौरा कर चुके हैं। लेकिन बाढ़ से हुई क्षति का सरकारी सर्वे पूरा नहीं हो सका है। जबकि 48 घंटे में सर्वेक्षण कार्य पूरा कराने की बात बृहस्पतिवार को जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने कही थी।
फसलें गईं पर जिंदगी बची, बस यही खुशी मनाएंगे
कलीनगर क्षेत्र के गांव कटकवारा निवासी देव सिंह ने बताया कि उसकी ढाई एकड़ कृषि भूमि है। धान की पकी फसल को हाथों से काटकर ढेर लगा लिए थे। मशीन आने का इंतजार कर ही रहे थे कि शारदा नदी में बाढ़ आ गई। सारी फसल बह गई। दो जानवर भी बह गए। दिवाली नजदीक है। बड़ी पुत्री गुड़िया की शादी को भी सोच रखा था लेकिन सब बर्बाद हो गया। दिवाली पर जिंदगी बचने की ही खुशियां मनाएंगे। चार पुत्री और दो पुत्रों का भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
सरकार ब्याज माफ कराए और राहत राशि दिलाए
जगरौली आशा निवासी प्रेमपाल ने बताया कि बैंक से केसीसी पर तीन लाख और निजी कंपनी से ट्रैक्टर पर चार लाख रुपये का कर्ज है। रविवार से पहले तक सब ठीक था और खेत में फसलें लहलहा रहीं थीं। यही उम्मीद थी कि फसल बिकेगी तो दो ढाई लाख रुपये मिल जाएगा लेकिन सैलाब में सपने भी बह गए। अब बैंक की किस्त और ट्रैक्टर की किस्त देने के लिए संकट है। बढ़ते ब्याज ने चिंता और बढ़ा दी है। सरकार कर्ज का ब्याज माफ कराए और राहत राशि तत्काल दिलाए तभी कोई भला हो सकता है।
सैलाब के साथ आई रेत में दब गई फसल
किसान राजदा बेगम ने बताया कि देवहा नदी की बाढ़ के पानी के साथ रेता आई और फसलें दब गईं। नौ बीघा खेत में धान, गन्ना और लाही की फसल थी। अब कुछ नहीं बचा। फसल के ऊपर दो से तीन फीट रेता है। फसल दबी पड़ी है। घर परिवार पर आर्थिक संकट है।
बिना ब्याज के ऋण दिलाए सरकार
किसान हरीराम ने बताया कि फसल बर्बाद हो चुकी है। घी, तेल से लेकर तमाम जरूरी सामान इतना महंगा है कि आम आदमी उसे खरीदने से पहले सौ बार सोचने के लिए मजबूर है। अब त्योहार कैसे मनाएं। यही सोचकर चिंता में डूब जाते हैं। सरकार अगर किसानों की आमदनी दोगुनी करने का इरादा रखेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेती है तो सबसे पहले तो जितनी क्षति हुई है उसकी पूर्ति कराए। फिर बिना ब्याज का ऋण दिलाए।
अब आगे की जिंदगी है भगवान भरोसे
नगरिया कॉलोनी निवासी भीम सरदार ने कहा कि नौ बीघा खेत बाढ़ के पानी के साथ आई रेत में दब गया। अभी तक उनके खेत से बाढ़ का पानी हटा नहीं है। फसल बर्बाद है। डीजल पेट्रोल और खाद की कीमतें आसमान छू रही हैं। दैवी आपदा के साथ महंगाई की मार से किसान पीड़ित है। इसलिए अब आगे की जिंदगी भगवान भरोसे है।