पूरनपुर। आंगनबाड़ी केंद्र भवन का निर्माण न कराकर पौने सात लाख रुपये गबन करने के मामले में चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस ने एडीओ की ओर से पूर्व प्रधान, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक (सेवा समाप्त) और रोजगार सेवक पर धोखाधड़ी कर धनराशि खुर्दबुर्द करने की रिपोर्ट दर्ज की है।
ग्राम पंचायत शहबाजपुर में पहले से दो आंगनबाड़ी केंद्र थे। 2018-19 में जिले में 79 आंगनबाड़ी भवन निर्माण का लक्ष्य मिला था। इसमें ग्राम पंचायत शहबाजपुर में एक आंगनबाड़ी केंद्र भवन का निर्माण होना था। मगर पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्र भवन का निर्माण न कराकर स्वीकृत 484280 रुपये और मनरेगा से खर्च होने वाले दो लाख रुपये का गबन कर लिया गया। खंड विकास अधिकारी सुनील जायसवाल ने स्वयं जांच करने के बाद छह सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। जांच में पुराने आंगनबाड़ी केंद्र भवन को नया दर्शा दिया गया। खंड विकास अधिकारी ने पत्रावली एडीओ (पंचायत) को भेजकर आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए थे। मगर रिपोर्ट दर्ज कराने में हुई हीला हवाली पर डीएम की नाराजगी के बाद एडीओ पंचायत ने बृहस्पतिवार शाम को पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने एडीओ पंचायत अजय देवल की ओर से तत्कालीन प्रधान कमलजीत कौर, तत्कालीन सेवानिवृत्त ग्राम पंचायत सचिव अशोक कटियार, सेवा समाप्त तकनीकी सहायक राजीव भारती, रोजगार सेवक बच्चू लाल पर धोखाधड़ी कर धनराशि गबन करने की रिपोर्ट दर्ज की है। दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि शहबाजपुर ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत को आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराना था। मगर ग्राम पंचायत की तत्कालीन प्रधान, तत्कालीन सेवानिवृत्त ग्राम पंचायत सचिव, सेवा समाप्त तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक ने आंगनबाड़ी केंद्र भवन का निर्माण न कराकर 684280 रुपये का गबन कर लिया। सीओ लल्लन सिंह ने बताया कि एडीओ (पंचायत) की तहरीर पर चारों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
करोड़ों का घोटाला मिलने पर बर्खास्त किया गया था तकनीकी सहायक
पूरनपुर। निजी फर्म बनाकर मनरेगा में घोटाला करने के आरोप पर डीएम पुलकित खरे ने जनवरी माह में मनरेगा कार्यों की जांच शुरू कराई थी। जांच में रोजगार सेवक और तकनीकी सहायकों की फर्में चलती मिली थी। इस पर तकनीकी सहायक सहित तीन लोगों को बर्खास्त कर काली सूची में डाल दिया गया था। एफआईआर के आदेश डीएम ने किए थे। मगर तब भी निचले स्तर पर कुछ अफसर घोटालेबाजों पर मेहरबान थे। हालांकि तब भी डीएम के सख्त रुख पर एफआईआर हुई थी।