पीलीभीत। कोरोना की दूसरी लहर में शायद ही ऐसा कोई कस्बा या गांव बचा हो जहां कोरोना ने दस्तक न दी हो। संक्रमण तेजी से फैलने के साथ लोगों की मौत भी खूब हुई। मगर शहर से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर बसा गांव नावकूड़ समाज के लिए एक मिसाल बना है। यहां पर कोरोना की अब तक एंट्री नहीं हो सकी है। ऐसा इसलिए हुआ है कि गांव वालों से मिलकर अपना एक अलग ही प्रोटोकॉल बना रखा है। जिसका पालन गांव के प्रत्येक सदस्य को करना होता है।
मरौरी ब्लॉक के गांव नावकूड़ की आबादी चार हजार से अधिक है। गांव में 2239 वोटर है। अधिकतर लोग खेतबाड़ी से जुड़े हुए हैं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में संक्रमण ने रफ्तार पकड़ने के बाद गांव में भी पैरा पसरना शुरू कर दिए थे। जब अन्य ग्रामीण इलाकों में कोरोना तेजी से पैर पसर रहा था। तब इस गांव के लोगों ने ग्राम प्रधान प्रेमवती के साथ मिलकर इस महामारी से निपटने के लिए अनूठी मिसाल पेश की है। ग्रामीणों ने सामूहिक ग्रुप बनाकर लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करना शुरू कर दिया। लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने में ग्राम प्रधानपति राजेंद्र कुमार भी पूरा सहयोग करते हैं। अगर किसी को किसी तरह की समस्या लगती थी, तो तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना देते थे, या फिर उसे निजी अस्पताल में इलाज करने की सलाह दी गई। अप्रैल और मई में कोरोना के पीक पर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने शहर की ओर भी अपना रुख कम कर दिया। शादी या अन्य मांगलिक कार्यक्रम में परिवार के सदस्य ही शामिल होते हैं। इधर टीकाकरण शुरू होने के बाद बुजुर्गों को टीकाकरण के लिए घर-घर जाकर प्रेरित करते हैं। अब तक 385 बुजुर्गों को टीके लग चुके हैं। रोजाना गांव में बने मंदिर में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए गांव के मौजूदा लोग ग्राम प्रधान पति के साथ बैठक की जाती है। जहां गांव की समस्या और टीकाकरण और कोरोना के मुद्दे पर चर्चा की जाती है। संवाद
गांवों में लागू प्रोटोकॉल
- आवश्यकता होने पर ही गांव के लोगों को घर से बाहर निकलने की इजाजत।
- गांव में दुकान खुलने का समय निर्धारित। हर दुकान के बाहर दो गज की दूरी पर गोल घेरा बनाए गए।
- गांव में लोगों के समूह में एकत्र होने की इजाजत नहीं।
- गांवों में निगरानी समितियों को सक्रिय किया गया है। समिति ऐसे लोगों को चिह्नित करती हैं जिनकी तबीयत खराब है।
ग्रामीण बोले- सब मिलकर करते हैं सहयोग
कोरोना के दौरान सिर्फ खेत पर काम करने जाते थे। ग्रामीणों की जागरूकता से गांव में कोई भी कोरोना संक्रमित नहीं मिला है। सभी की एकता से हम लोगों ने कोरोना पर जंग जीती है और आगे भी इस तरह प्रयास रहेगा। - कांता प्रसाद
जब कोरोना तेजी से फैल रहा था। तभी अधिकतर ग्रामीणों ने शहर जाना बंद कर दिया था। दुकानदारों पर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए खरीदारी कराई जा रही थी। इस पहल से हमने गांव को कोरोना से बचा लिया। - रूपचंद्र
गांव के बुजुर्ग लोग सभी को जागरूक कर रहे थे। कोई भी व्यक्ति किसी भी बाहरी स्थान पर शादी में शामिल होने के लिए नहीं जा रहा था। किसी को कोई परेशानी होती थी तो तत्काल डॉक्टर को सूचित किया जाता था। - यादराम
ग्रामीणों के सहयोग से गांव को कोरोना से बचाया है। यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। साफ-सफाई सैनिटाइजेशन की व्यवस्था कराई जा रही है। साथ ही ग्रामीणों के साथ हर छोटे मुद्दे पर चर्चा की जाती है, ताकि समस्या का समाधान किया जा सके। राजेंद्र कुमार प्रधान पति