पीलीभीत। किसी किसान के घर में शादी है, तो किसी को इलाज के लिए पैसों की जरूरत। गन्ने का भुगतान पहले से ही लटका हुआ है। जैसे-तैसे धान तो बेच दिया मगर अब उसका भुगतान भी फंस गया है। बाढ़ से तबाह हुए किसानों को सरकारी कार्यप्रणाली ने पूरी तरह से तोड़ दिया है। जरूरी कामों के लिए किसान साहूकारों और बैंकों से ऋण लेने को मजबूर हैं। वहीं कुछ किसानों को किस्त जमा करने की चिंता सता रही है।
शासन किसानों को समर्थन मूल्य देने के लिए वादा तो कर रहीं है, मगर धरातल में दिखाई नहीं दे रहे है। जिले की तीन चीनी मिलों पर159 करोड़ गन्ना भुगतान पहले से ही लटका हुआ है। जबकि 14 दिनों में गन्ने का भुगतान किसानों बैंक खातों में भेजने कर नियम है। इसके बाद भी मिलों पर गन्ना भुगतान नहीं किया और नए पेराई सत्र की तैयारियां शुरू कर दीं हैं। वहीं किसानों को धान खरीद पारदर्शिता के साथ शुरू कराने और 72 घंटा में भुगतान देने का शासन की ओर से निर्देश जारी किया गया। अब तक जिले में छह एजेंसियों के क्रय केंद्रों पर सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लक्ष्य से 31537.10 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। अभी तक के धान खरीद का कुल 611 करोड़ हो चुका है। जबकि 251 करोड़ का भुगतान हो पाया है और 395 करोड़ का भुगतान किसानों का लटक हुआ है। अफसरों का तर्क है कि जल्द ही किसानों का भुगतान उनके खातों में पहुंच जाएगा। शादी ब्याह का सीजन भी शुरू हो गया है किसानों की मुख्य आय का श्रोत फसल होती है। फसल बिक्री के बाद भुगतान रुकने से किसानों को काफी दिक्कत हो रही है। अपने बच्चों की शादी और अन्य कामों को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पा रहे है। धान और गन्ने का भुगतान कब तो होगा। इसकी भी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
किस गन्ना मिल पर कितना भुगतान है शेष
चीनी मिल बकाया भुगतान
बीसलपुर 2147.40 लाख
पूरनपुर 145802 लाख
बरखेड़ा 12389.97 लाख
कुल 15995.39 लाख
000
धान खरीद का किस एजेंसी पर कितना है बकाया
एजेंसी बकाया भुगतान
पीसीएफ 423.24 लाख
यूपीएसएस 2157.62 लाख
पीसीयू 1379.15 लाख
खाद्य विभाग -
मंडी परिषद -
भाखनि -
कुल 3954.00 लाख
000
किस एजेंसी के कितने क्रय केंद्रों पर हो रही है धान खरीद
एजेंसी क्रय केंद्र संख्या
खाद विभाग 30
पीसीएफ 30
यूपीएसएस 38
पीसीयू 43
मंडी परिषद 05
भाखनि 03
कुल 149
बीसलपुर और पूरनपुर चीनी मिलों से वार्ता हुई है। इसी माह के अंत तक पूरा भुगतान करने का आश्वासन मिला है। बरखेड़ा चीनी मिल पर काफी बकाया है लिए इसके खिलाफ शासन को भी लिखा गया है। धान खरीदा का 40 फीसदी भुगतान हो चुका है। कुछ एजेंसियों का भुगतान काफी धीमी है। इसको लेकर शासन स्तर से बात की जा रही है। - पुलकित खरे डीएम
किसान सहकारी चीनी मिल बीसलपुर पर पिछले वर्ष का 21 हजार रुपया गन्ना मूल्य भुगतान बाकी है। जेठानी अनुपम देवी डेंगू की चपेट में आ गई हैं, वह बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें पैसे की सख्त आवश्यकता है। चीनी मिल से भुगतान न मिल पाने के कारण वह उधार लेकर अपनी जेठानी का उपचार करा रही हैं। - अंगूरा देवी, किसान गांव चठिया सेवाराम
बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल बरखेड़ा पर पिछले वर्ष का 62 हजार रुपया गन्ना मूल्य भुगतान बाकी है। बारिश और बाढ़ में धान की फसल भी खराब हो गई है। चीनी मिल से भुगतान न मिल पाने के कारण पैरालिसिस से पीड़ित अपने वृद्ध पिता दामोदर प्रसाद मिश्रा का उपचार नहीं करा पा रहे हैं। - सत्यवीर मिश्रा, किसान गांव मुड़िया कोकिली
दिवाली से पहले 85 क्विंटल धान सरकारी क्रय केंद्र पर बेचने थे। जिसका भुगतान डेढ़ लाख से अधिक बना है। 72 घंटा में भुगतान देने का वादा तो किया जा रहा है, मगर दस दिन बीतने के बाद भी भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इसी से परेशान होकर किसान औने पौने दामों में धान को बेंचते है। - विपिन शुक्ला, किसान, करेली