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किराए की छोटी-छोटी कोठरियों में दम तोड़ रहे आंगनबाड़ी केंद्र

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छोटे से कमरे में मोहल्ला मोहम्मद वासिल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संचालित करती हैं अपना केंद्र। ? - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। बेशक बाल विकास कार्यक्रम अंतर्गत केंद्र व राज्य सरकार करोड़ों रुपये प्रति वर्ष खर्च करती है। मगर शहर में जमीनी तौर पर बाल विकास की परियोजना सफल नहीं हो सकी। शहर के किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र के पास अपना भवन नहीं है। किराए की छोटी-छोटी कोठरियों में आंगनबाड़ी केंद्र दम तोड़ रहे हैं। जहां बच्चों को खेलने और बैठने तक के लिए साफ स्वच्छ माहौल नहीं मिल पाता। उनके बौद्धिक और शारीरिक विकास की गतिविधियां कायदे से संचालित नहीं हो पाती हैं। यह बात खुद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्वीकार की है।
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शहर में 139 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं लेकिन किसी एक के पास भी अपना भवन नहीं है। जहां तक किराए पर भवन लेने की बात है। विभागीय स्तर से मात्र 750 रुपये प्रति महीना किराया देय है। इतने कम किराए में इस महंगाई के दौर में कोई छोटी सी कोठरी भी नहीं मिलती है। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा मानक क्यों रखा गया, जिसमें भवन मिल ही न सके। दूसरी अहम बात यह भी है कि जब ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी धन से अपने आंगनबाड़ी केंद्र भवन बनाए जा रहे हैं तो शहर में क्यों नहीं?
भवन बनाने के लिए जमीन के साथ 7.5 करोड़ चाहिए
जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार का कहना था कि भवन बनाने के लिए विभाग तैयार है लेकिन जमीन नहीं है। जमीन के लिए नगरपालिका को लिखा गया है लेकिन जमीन नहीं मिली। भवन कैसे बनता। उन्होंने बताया कि 100 आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के लिए 7.5 करोड़ चाहिए, वह भी तब जब पालिका की ओर से निशुल्क जमीन मिले। आंगनबाड़ी केंद्र के लिए एक छोटे से भवन की लागत 7.5 लाख रुपये आती है।
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यह काम होने हैं आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से
छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को पूरक पोषण देना
गर्भवती महिलाओं और बच्चों का नियमित टीकाकरण सुनिश्चित कराना
छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के स्वास्थ्य और गर्भवती की प्रसव पूर्व देखरेख
धात्री या स्तनपान कराने वाली माताओं की देखरेख, सेहत की नियमित जांच
कुपोषण का प्रबंधन, जरूरी दवाओं का वितरण कराना
युवा लड़कियों को और परिवार के स्वास्थ्य पोषण और विकास जानकारी देना
बाल विकास योजना पर एक नजर
1960 आंगनबाड़ी केंद्र
1754 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
1500 सहायिकाएं
5500 रुपये मानदेय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का
2700 रुपये महीने सहायिका को मिलता है मानदेय
मैं अपने केंद्र को बहुत अच्छे ढंग से संचालित करना चाहती हूं लेकिन 750 रुपये महीने में कोई छोटा सा कमरा भी किराये पर मिलता नहीं है। इसलिए बच्चों के बौद्धिक और शारीरिक विकास की गतिविधियों को संचालित करना एक चुनौती है। - गुलशन जहां, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
मैं मानती हूं कि हर काम सरकार नहीं कर सकती। ऐसे में अगर समाजसेवी लोग आगे आएं और अपने शहर के बच्चों के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन उपलब्ध कराएं। मौजूदा दौर में भी बच्चों के बेहतर विकास के लिए काम हो सकता है।
- गायत्री शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
अपने प्रयासों से इतने कम किराए में हम एक कमरा और बरामदा ले लेते हैं तो भी कुछ ही दिनों में दिक्कत आने लगती है क्योंकि आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले बच्चे खेलते समय शोर मचाते हैं और मकान मालिक कहने लगता है कि इससे उन्हें दिक्कत है।- परवीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
मेरा तो यही कहना है कि जब बच्चे देश की बुनियाद होते हैं तो फिर उनके लिए साफ स्वच्छ और बेहतर केंद्र बनाने के लिए अपना भवन देना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार इस ओर काम करेगी तभी जल्दी से जल्दी समस्या का समाधान हो सकेगा। - कल्पना शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
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