पीलीभीत। आंदोलन के दौरान ट्रैक पर पहुंचे किसानों को पुलिस फोर्स ट्रैक से हटा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने किसी किसान की पगड़ी उतार दी। किसानों का कहना था कि पुलिसकर्मी किसान से माफी मांगे। मगर इसको भाकियू जिलाध्यक्ष ने गंभीरता से नहीं लिया। इस पर किसानों ने जिलाध्यक्ष पर प्रशासन से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए उनके विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। इस बीच अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच में भी पुलिस कर्मी द्वारा पगड़ी उतराने की पुष्टि नहीं हुई।
जंक्शन परिसर में आंदोलन के दौरान उस समय हंगामा शुरू हो गया, जब एक किसान की पगड़ी पुलिस कर्मी द्वारा उतराने का आरोप लगा दिया। किसानों का आरोप था कि पुलिस कर्मी ने जानबूझकर पगड़ी उतारी है। आक्रोशित किसान पुलिस के विरोध में नारेबाजी करने लगे। किसानों कहना था कि आरोपी पुलिसकर्मी आकर माफी मांगे। जबकि पुलिस अफसर इस बात को मानने को तैयार नहीं हुए। किसानों का आरोप था कि भाकियू जिलाध्यक्ष सतविंदर सिंह कहलो ने माफी मांगने की बात तक असफरों तक नहीं पहुंचाई। माफी मंगवाने के बजाय सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन खत्म कर दिया। इस पर किसान आक्रोशित हो गए और प्रशासन से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए जिलाध्यक्ष के विरोध में नारेबाजी करने लगे। हालांकि बाद उग्र किसानों को अन्य लोगों ने शांत कर दिया था। मामला चर्चा का विषय बना रहा। जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि आंदोलन के दौरान वीडियोग्राफी हुुई है उसकी जांच की गई है। इसमें पुलिस कर्मी नहीं बल्कि किसान के एक साथी का ही पगड़ी में हाथ लग गया था।
किसान की पगड़ी के मामले में वीडियो देखे गए। वीडियो में पुलिसकर्मी नहीं बल्कि किसान के ही एक साथी का हाथ पगड़ी में लग गया था। वीडियो देखने से हकीकत सामने आई है। वीडियो देखकर किसान संतुष्ट हो गए हैं।
- डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी, एएसपी