पीलीभीत। बरखेड़ा की ग्राम पंचायत पतरासा कुंवरपुर में ग्रामीणों की शिकायत के बाद सोशल ऑडिट टीम ने चार दिन में विकास कार्यों का सत्यापन किया। इसमें 2.15 करोड़ के कार्यों की जांच हुई। जांच में 80 फीसदी काम फर्जी पाए गए। टीम को कई काम ऐसे मिले, जो आसपास की ग्राम पंचायतों में कराए गए हैं। एक खड़ंजा के निर्माण को दो वित्तीय वर्ष में नौ बार धनराशि निकाली गई थी। जांच रिपोर्ट टीम की ओर से उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
ग्राम पंचायतों के विकास के लिए शासन की ओर से लगातार बजट भेजा जाता है, मगर वह किस काम में लगाया जाता किसी को नहीं पता। ऐसे ही एक मामले का बरखेड़ा की ग्राम पंचायत पतरासा कुंवरपुर में सोशल ऑडिट टीम की जांच में खुलासा हुआ है। टीम ने आठ अक्तूबर को गांव में विकास कार्यों की जांच शुरू की थी। 11 अक्तूबर को सोशल ऑडिट टीम ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर बयान दर्ज किए। मौजूदा ग्राम प्रधानपति राजकुमार समेत ग्रामीणों ने टीम को बताया कि गांव में 340 मीटर लंबे खड़ंजा को बिना निर्माण कराए ही नौ बार धनराशि निकाली गई थी। इसके अलावा एक काम कराने के बाद कई बार उसका नाम बदलकर धनराशि का हेरफेर किया गया। चकमार्ग बनाने के दौरान भी लाखों रुपये का हेरफेर किया था। इसके बाद भी मनरेगा के कामों में भी लाखों का हेरफेर किया गया। टीम ने 2.15 करोड़ के विकास कार्यों की टीम ने जांच की थी। इसके 80 फीसदी कार्य फर्जी पाए गए हैं। जिला कोऑडिनेटर ने बताया कि जांच करने के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
पंचायती राज विभाग की संरक्षण में होता है खेल
ग्राम पंचायतों में विकास कार्य को लेकर आए दिन ग्रामीण शिकायत करते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर उन शिकायतों को गौर करने के बजाय आरोपियों को संरक्षण देते हैं। इससे गांव में विकास कार्य को गति नहीं मिल पाती है। कई ग्राम पंचायतों आज भी करोड़ों रुपये का घोटाला हो रहा है। मगर अधिकारियों की लापरवाही से कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
ग्राम पंचायत पतरासा कुंवरपुर 2.15 करोड़ के विकास कार्यों का सत्यापन किया गया। चार में दिन में सत्यापन पूरा करने के बाद ग्रामीणों के बयान लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी। वहीं से आगे की कार्रवाई होगी। - विजया गंगवार, जिला कोऑर्डिनेटर, सोशल ऑडिट
गांव पतरासा कुंवरपुर सोशल ऑडिट टीम ने जांच की है। विकास कार्यों में बड़ी हेराफेरी गंभीर मामला है। सोशल ऑडिट टीम की रिपोर्ट देर में मिलेगी, मगर अपनी ओर से टीम का गठन कर तत्काल जांच कराएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - प्रशांत श्रीवास्तव, सीडीओ