पीलीभीत। प्रधानों और कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम से फर्म बनाई, उन्हीं के माध्यम से सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी सामग्री सप्लाई कराकर लाखों के बजट का बंदरबांट कर लिया। मामला सामने आने के बाद डीएम ने ऐसी 111 फर्म और वेंडरों को मनेरगा पोर्टल से हटाने और संबंधित एपीओ का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही दस फर्म को नोटिस जारी किया है।
पिछले दिनों मनरेगा कार्यों को लेकर डीएम के पास तमाम शिकायतें पहुंची थी। इनमें कुछ प्रधानों और कर्मचारियों को लेकर शिकायतें थी कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों के नामों से फर्म पंजीकृत कराकर सामग्री सप्लाई करा रहे हैं। डीएम ने मामले की जांच कराई तो एक-दो नहीं बल्कि ऐसी तमाम फर्में सामने आईं। डीएम ने सोमवार को इस मामले में कार्रवाई की। मनरेगा पोर्टल से 111 वेंडर और फर्मों को निष्क्रिय करने के साथ संबंधित ब्लॉक के एपीओ का वेतन रोकने के आदेश जारी किए। निर्देश दिए कि जब तक पोर्टल से इनके नाम नहीं हट जाते और एपीओ इसके सुबूत नहीं देते तब तक इनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। ग्राम प्रधानों और कर्मचारियों के रिश्तेदारों के नाम से पंजीकृत फर्म को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
इन फर्मों को जारी किए नोटिस
श्रीराम एंटरप्राइज, मेसर्स श्री बालाजी सीमेेंट स्टोर, रामा ट्रेडर्स, मेसर्स गंगवार एजेंसी, कबरी ब्रिक फील्डस, पूजा ब्रिक फील्डस, प्रताप सत्यम, मेसर्स कादरी ब्रिक सेंटर, रजा ब्रिक, वारसी ब्रिक फील्डस।
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मनरेेगा कार्यों में लगाया लाखों का चूना
मनरेगा कार्यों के तहत प्रधानों ने कर्मचारियों से मिलकर लाखों रुपये का चूना लगाया। अब प्रशासन इसकी भी जांच करा रहा है कि संबंधित फर्मों के माध्यम से कितना काम कराया गया। विभाग से मिली जानकारी के मुताबित कई जगह फर्जी बिल लगाकर पैसा निकाल लिया गया। धरातल पर वो कार्य हुए ही नहीं। पूरे जिले में जांच के बाद ही सामने आएगा कि असल में कितने रुपये का चूना लगाया गया है।
कुछ प्रधानों और कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम से फर्म पंजीकृत करा रखी थी। मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में उन्हीं फर्मों से सप्लाई हो रही थी। ऐसी फर्म को नोटिस जारी किया गया है। एपीओ का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं।
- पुलकित खरे, डीएम