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सीएम के दौरे के साथ जिले में होगा भाजपा का चुनावी शंखनाद

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पीलीभीत। मुख्यमंत्री के दौरे के साथ जिले में भाजपा का चुनावी शंखनाद होगा। राजनीतिक हलचल बढ़ने के आसार बन रहे हैं। भाजपा के स्थानीय नेता दूसरे दलों के कुछ दिग्गजों से संपर्क बनाए हुए हैं। अगर बात बनती है तो मुख्यमंत्री के आने से पहले ही एक बड़े नेता बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। मुख्यमंत्री का दौरा वैसे तो सरकारी है लेकिन विधानसभा का चुनाव सामने है। इसलिए इसके सियासी अर्थ भी निकाले जा रहे हैं। दौरे के दौरान भाजपा संगठन और भाजपा के चारों विधायकों को पूरी तवज्जो मिलेगी। यह बात भी साफ है। साथ ही मुख्यमंत्री जनता को संबोधित करेंगे। जनता के मुद्दों पर मुख्यमंत्री सीधी बात करेंगे। अभी उनके दौरे की तिथि तय नहीं हुई है लेकिन शासन स्तर से लेकर प्रशासन स्तर तक होमवर्क चल रहा है।
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जिलाधिकारी से मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय ने उन परियोजनाओं की लिस्ट मांग ली है जिनका मुख्यमंत्री के हाथों 3237 लाख की 46 परियोजनाओं का शिलान्यास/उद्घाटन कराया जा सकता है। जो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं उनका लोकार्पण होगा। जिनकी शुरूआत होनी है। उनका शिलान्यास का शिलालेख लगेगा। जनता के साथ मुख्यमंत्री सीधा संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को लेकर सियासत में भी हलचल है। भाजपा के स्थानीय नेता दूसरे दलों के उन नेताओं के संपर्क में हैं जो भाजपा में आना चाहते हैं लेकिन इस बारे में विधायक सदर संजय सिंह गंगवार अभी कुछ कहना नहीं चाहते हैं। भाजपा विधायक का कहना है कि लोगों का झुकाव भाजपा की ओर है क्योंकि भाजपा ही देश को नेतृत्व दे सकती है लेकिन कौन-कौन लोग चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होेंगे? यह अभी नहीं बताया जा सकता है। किसे पार्टी में शामिल किया जाना है? यह काम संगठन के हाथ में है लेकिन इतना तय है कि भाजपा के वोटों के खजाने में मुख्यमंत्री का दौरा कुछ न कुछ इजाफा करेगा। विरोधियों पर वार तीखे होंगे।
चारों सीटों को भाजपा के खाते में बनाए रखने की रणनीति
जिले की चारों सीटें अभी भाजपा के खाते में हैं। सदर क्षेत्र से संजय सिंह गंगवार, बीसलपुर से रामसरन वर्मा, पूरनपुर से बाबूराम पासवान, बरखेड़ा से किशनलाल राजपूत विधायक हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव बसपा, कांग्रेस और सपा का खाता ही नहीं खुला। ऐसे में चारों सीटों को भाजपा के खाते में बनाए रखने की चुनौती है। सीएम का दौरा इसमें अहम है। दौरे को राजनीतिक क्षेत्र में इसी दृष्टि से देखा जा रहा है।
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