पीलीभीत। अगर आप अपनी आमदनी बढ़ाकर प्राकृतिक तरीके से रसायमुक्त खेती करना चाहते हैैं तो कृषि विभाग आपको प्रोत्साहन देगा और निकट भविष्य में केमिकल फ्री पैदावार के लिए अनुदान भी मिल सकता है। इस संबंध में जिला स्तरीय गंगा विकास समिति की तीन बैठकें हो चुकी हैं। गोमती नदी के किनारे स्थित 12 गांवों को इस योजना के लिए चुना गया है।
जिलाधिकारी पुलकित खरे ने गोमती उद्गम स्थल से जनपद की सीमा में गोमती नदी की अविरल धारा के लिए खोदाई कराई है। खोदाई का कार्य 15जून तक पूरा होगा। इसके साथ ही नदी के किनारे स्थित खेती योग्य जमीन को केमिकल फ्री खेती के लिए तैयार किया जाना है। जिलाधिकारी ने बताया कि प्राकृतिक तरीके से पैदा होने वाले खाद्यान्न की मांग बाजार में तेजी के साथ बढ़ रही है। आने वाला समय इसी का है। इसलिए किसानों इस बारे में जागरूक करने का काम कृषि विभाग कर रहा है।
इसी क्रम में जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार ने प्राकृतिक कृषि विकास योजना लागू की है। योजना के तहत देश भर की नदियों के किनारे पर प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देना और केमिकलयुक्त खेती को हतोत्साहित करना है। इसलिए किसानों से कृषि विभाग के कर्मचारी गांव-गांव जाकर संवाद कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पूरनपुर और कलीनगर तहसील के कृषि विभाग के कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक गांव में 50 एकड़ जमीन का एक ऐसा क्लस्टर विकसित किया जाएगा। जिसमें शामिल सभी किसान प्राकृतिक तरीके से खेती करेंगे। वे कीटनाशक और रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करेंगे। किसानों से संवाद में नतीजे उत्साहित करने वाले हैं।
क्या है प्राकृतिक खेती - जिला कृषि अधिकारी डॉ. विनोद कुमार यादव ने बताया कि कीटनाशक और रासायनिक खादों का प्राकृतिक तरीके से खेती करने में इस्तेमाल नहीं होता है। गाय के गोबर और मूत्र से तैयार घनजीवामृत और जीवामृत का इस्तेमाल होता है। इससे पैदावार नहीं घटती और लागत में जरूर कमी आ जाती है। इसलिए किसान इसके लिए तैयार हो रहे हैं।
‘नदी किनारे वाले क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त और प्राकृतिक सुंदरता से हरा-भरा करने की योजना है। इसके लिए शासन गंभीर है। खेती में प्राकृतिक और परंपरागत तरीके को प्रोत्साहन दिया जाना है। साथ ही नदी के किनारों पर पौधे लगवाए जाएंगे। इसके लिए वन विभाग और कृषि विभाग को अलग अलग जिम्मेदारी दी गई है।’
- पुलकित खरे, जिलाधिकारी
यह हैं 12 गांव गोपालपुर,कल्याणपुर, सबलपुर रंपुरा, माधोटांडा, शेरपुर मकरंदपुर, भीमपुर नौगजा, शाहबाजपुर, हरिपुर फुलहर, अजीतपुर बिल्हा, नवादिया धनेश, सिरसा और देवीपुर गांव में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।