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नोट और तंत्र साधना के फेर में संकट ग्रस्त कछुआ प्रजाति

Mon, 14 Oct 2013 05:42 AM IST
Pilibhit
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पीलीभीत। खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत के जंगलों में स्थित नदियों, पोखरों और तालाबों से दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का व्यापार तेजी से हो रहा है। दीपावली नजदीक आते ही तंत्र साधना के लिए कछुओं की मांग बढ़ गई है। तस्करों के तराई से लेकर सूबे के कई जिलों तक तार जुड़े हैं। तांत्रिकों का दावा है कि 20 नख (नाखून) वाले कछुए मिल जाएं तो साधना के जरिए वे नोटों की बारिश करा सकते हैं।
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जलचरों में शामिल कछुओं का व्यापार तराई के खीरी और पीलीभीत जिले के जंगलों से भारी पैमाने पर किया जा रहा है। सूबे के दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत का जंगल नदियों, पोखरों से आच्छादित हैं। कछुओं की तस्करी करने वालों का नेटवर्क सूबे के कई जिलों में फैला हुआ है। वैसे कछुओं की तस्करी का कारोबार मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए भी होता है, लेकिन तंत्र-मंत्र विद्या के जरिए नोटों की बारिश कराने वाले तांत्रिकों के दावों के कारण कछुओं की मांग इधर तेजी से बढ़ गई है। इनमें 20 और 18 नख (नाखून) वाले कछुओं की मांग कुछ ज्यादा है। दीपावली पर तंत्र-मंत्र साधना के कारण बढ़ती मांग को देखते हुए तस्कर सक्रिय हो गए हैं।
तांत्रिकों का कहना है कि 20 और 18 नख वाले कछुए मिल जाएं तो वह तंत्र साधना से नोटों की बारिश करा सकते हैं। इसके लिए कछुओं का वजन भी मायने रखता है। 20 नख वाले कछुए का वजन 250 ग्राम से अधिक न हो। 12 नख हों तो ढाई किलो का हो, आठ नख का हो तो साढ़े चार किलोग्राम का होना चाहिेए। इस वजन और नख वाले कछुओं से नोटाें की बरसात हो सकती है। कम वजन के कछुओं को तो लोग तंत्र-मंत्र के लिए घरों में भी पालते हैं।
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पकड़े जा चुके छह दर्जन से अधिक कछुए
खीरी और पीलीभीत जिले को मिलाकर साल भर में छह दर्जन से अधिक कछुए बरामद हो चुके हैं। हाल ही में 10 अक्तूबर 2013 को अमरिया पुलिस ने पूरनपुर के जंगल में शारदा नहर से पकड़कर ले जाए जा रहे 30 कछुए बरामद कर राजू मजमूदार निवासी जगतपुरा वार्ड संख्या एक और सत्यजीत बंगाली निवासी गहतोश पिपरिया रुद्रपुर को गिरफ्तार कर चालान भेजा था। इससे पूर्व सुनगढ़ी, गजरौला और माधोटांडा पुलिस भी कछुआ तस्करों को पकड़कर जेल भेज चुकी है।
खीरी जिले के उत्तर खीरी नार्थ रेंज बेलरायां के वन कर्मचारियों ने थाना सिगांही के गांव खैरीगढ़ में छापामार कर एक दर्जन से अधिक कछुए बरामद किए थे। एसएसबी डांगा चौकी ने भी इसी थाना क्षेत्र के गांव महमदपुर में दो लोगों को डील करते हुए कछुओं समेत दबोचा था।
नरम परत देखकर तय होती हैं कीमत
नरम परत वाले कछुओं के अधिक फूलने के कारण काफी देर तक नोटों की बारिश होती है। कछुओं की कीमत नरम व कड़ी परत देखकर तय होती है। 20 नख वाले नरम कछुओं से एकाएक धनवान बनने की मंशा रखने वाले बड़ी रकम देने को तैयार हो जाते हैं। यदि किसी शिकारी के हाथ 18 नख वाला कछुआ लग जाता है तो वह भी बड़ी कमाई करता है।
तमाम मान्यताएं और भ्रांतियां
कछुओं के इस पूरे खेल को लेकर कई मान्यताएं है तो भ्रांतियां भी हैं। मसलन कछुए के पेट में जितने का नोट रखा जाएगा, उसी राशि के नोटों की बरसात होगी। लिहाजा लोग हजार का नोट लेकर तांत्रिकों के पास पहुंचते हैं। हमेशा तंत्र-मंत्र का यह अनुष्ठान सुनसान स्थानों पर होता है। मान्यता है कि तंत्र-मंत्र से मिले पैसे को तीन माह में ही खर्च करना होता है नहीं तो नोट अपने आप उड़ जाते हैं। नोटों के लालच में लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं।
कछुओं की यहां है उपलब्धता
शारदा, घाघरा, मोहाना, देवहा, खकरा, के साथ नेपाल से आने वाली कर्नाली नदी में दुर्लभ कछुए मिलते हैं। यहां पाए जाने वाले 20 व 16 नख के कछुए की तंत्र मंत्र में खूब मांग है।
कई लोग हो चुके हैं ठगी का शिकार
नोट बरसाने का दावा करने वाले तांत्रिकों का नेटवर्क पीलीभीत समेत कई जिलों में फैला हुआ है। हालांकि इस खेल में किसी को धन मिलता देखा नहीं गया। इसकी वजह यह है कि अक्सर तांत्रिक यह कहकर कन्नी काट लेते हैं कछुआ के वजन और नख में कुछ कमी थी। ठगे गए लोग पूरनपुर, न्यूरिया, उत्तरीसेहरामऊ के हैं, लेकिन अपनी मूर्खतावश वह मुंह नहीं खोल रहे हैं।

कई लोग कछुओं समेत पकड़े जा चुके हैं। दो दिन पूर्व अमरिया पुलिस ने 30 कछुए बरामद कर दो का चालान भेजा था। तांत्रिकों के जरिए ठगे जाने के मामले की किसी ने अभी तक शिकायत नहीं की है। अगर शिकायत मिली तो रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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एन कोलांची, एसपी पीलीभीत
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