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427 करोड़ लागत... 84 किलोमीटर ट्रैक फिट फिर भी ट्रेनों के चलने का पता नहीं

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पीलीभीत। शाहजहांपुर रूट पर ट्रेन का सफर यात्रियों के लिए सिर्फ एक सपना बनकर रह गया है। 427 करोड़ की लागत से 84 किलोमीटर में 37 माह बीतने के बाद भी ट्रेन चलने की अभी कोई उम्मीद नहीं है। यह आलम तब है जब सीआरएस ने चार अगस्त को फाइनल निरीक्षण कर ट्रैक को ओके कर दिया है। मगर 60 दिन बाद भी इस रूट पर ट्रेन चलने की अभी तक कोई संभावना नहीं है। कभी मालगाड़ी का ट्रायल तो कभी कोयला भरी मालगाड़ी की आवाज सुनकर लोग ट्रेन जल्द ही चलने के कयास लगा रहे हैं।
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जनपद में ब्राडगेज का लंबे समय के इंतजार के बाद 2016 में पहली बार भोजीपुरा और पीलीभीत के बीच ट्रेनों का संचालन शुरू होने से जनपदवासियों में खुशी का ठिकाना न रहा है। पहली बार ब्राडगेज की ट्रेन जंक्शन पहुंची तो देखने के लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी पड़ी। इसके बाद भोजीपुरा वाया पीलीभीत टनकपुर के लिए ब्राडगेज की ट्रेनों का संचालन होने लगा था। इसके बाद लखनऊ रूट पर मैलानी तक 67 किलोमीटर और शाहजहांपुर तक 84 किलोमीटर तक के लिए आमान परिवर्तन का काम शुरू करने के लिए 31 मई 2018 को एक साथ दोनों रूटों पर शाम छह बजे आखिरी मीटरगेज की ट्रेन रवाना करने के बाद हमेशा के लिए मीटरगेज की ट्रेनों को अलविदा कह दिया गया। इसके बाद शाहजहांपुर रूट पर 427 करोड़ की लागत से एक जून 2018 से आमान परिवर्तन का काम शुरू कर दिया गया। कुछ दिन तक काम तेजी के साथ हुआ। इसके बाद धीमी गति में चला गया। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद काम में तेजी आई और बीसलपुर तक 37 किलोमीटर के बीच 20 माह में काम पूरा होने के बाद फरवरी 2020 में सीआरएस निरीक्षण हो गया। इसके बाद फरवरी 2020 से अक्तूबर 2020 में बीसलपुर और शहबाजनगर के बीच काम पूरा हो गया। नवंबर 2020 में निरीक्षण करने के बाद सीआरएस ने इसी माह में ट्रेन चलाने के लिए हरी झंडी दे दी। इसके बाद भी अफसरों इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। जबकि उस समय शहबाजनगर और शाहजहांपुर बीच पांच किलोमीटर में उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे की वजह से काम को रोक दिया गया था। इससे पीलीभीत-शहबाजनगर के बीच 79 किलोमीटर में ट्रेनों को चलाने की संभावना बताई जा रही थी। मगर अफसोस ट्रेनों को संचालन नहीं हो सका। संवाद
सात माह में दूर हो सका उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे का रोड़ा
पूर्वोत्तर रेलवे डिवीजन के तहत शहबाजनगर तक 79 किलोमीटर में तीन साल में काम पूरा कर लिया गया। इसके बाद शाहजहांपुर और शहबाजनगर के बीच काम शुरू किया गया था। पांच माह में पांच किलोमीटर का काम पूरा करने के बाद शाहजहांपुर स्टेशन पर नॉन इंटरलाकिंग के लिए काम रुक गया। दोनों डिवीजनों की सहमति के बाद 22 से 28 जुलाई 2021 में नॉन इंटरलॉकिंग का काम पूरा किया गया। चार अगस्त को रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने निरीक्षण ट्रैक ओके कर दिया था। इससे जल्द ही इस रूट पर ट्रेनों के संचालन को लेकर रेलवे सूत्र बता रहे थे। मगर दो माह बीतने के बाद भी संचालन शुरू नहीं हो सका।
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जीएम भी कर चुके हैं स्पीड ट्रॉयल और विंडों निरीक्षण
तीन अक्तूबर को पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम विनय कुमार त्रिपाठी ने पीलीभीत पहुंचकर इस रेल खंड का पहले स्पीड ट्रॉयल किया था। इसके बाद विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया। रेल सूत्रों ने बताया कि तीन निरीक्षण के बाद ट्रेनों के संचालन की संभावना है। मगर अभी तक कोई तैयारी नहीं है।
ट्रेनों के संचालन को लेकर भेजा जा चुका है प्रस्ताव
शाहजहांपुर में उत्तर रेलवे के प्लेटफार्म पर एनआई (नॉन इंटरलाकिंग) का पूरा और सीआरएस निरीक्षण होने के बाद अगस्त में ही इज्जतनगर मंडल की ओर से ट्रेन के संचालन को लेकर प्रस्ताव मांग गया था। इसमें स्थानीय अधिकारियों ने दो ट्रेनों के संचालन का प्रस्ताव भेजा था। एक सुबह और एक दोपहर में पीलीभीत से जबकि एक दोपहर और एक शाम को शाहजहांपुर से रवाना होनी है। इसके बाद भी अभी तक कोई मंजूरी नहीं मिल सकी है।
महाप्रबंधक ने निरीक्षण करने के बाद व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। इसी माह ट्रेन चलाने की तैयारी है। रेलवे बोर्ड से झंडी मिलने के बाद संचालन शुरू करा दिया जाएगा। - राजेद्र सिंह, पीआरओ इज्जतनगर मंडल
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