पूरनपुर। स्टांप पेपर की किल्लत से 10 वाला स्टांप 20 रुपये में, 20 वाला 30 रुपये में बिक रहा है। 50 और 100 रुपये के स्टांप तो मिल ही नहीं रहे। टिकट (अधिवक्ता कूपन) न मिलने से बगैर टिकट के काम चलाया जा रहा है। वजह ई-स्टांपिंग के बाद वेंडरों ने अभी काम शुरू नहीं किया है। पुराने स्टाक पर ही अधिक वसूली की जा रही है।
ई-स्टांपिंग प्रणाली प्रदेश के कई जिलों में लागू हो चुकी है। यहां भी वेंडरों के लाइसेंस बन चुके हैं। मगर अब तक किसी स्टांप वेंडर ने ई-स्टांप का काम शुरू नहीं किया है। फिलहाल मैनुअल स्टांप से ही काम चल रहा है। स्टांप वेंडर पीलीभीत, बरेली से स्टांप खरीद कर बिक्री कर रहे हैं। इससे तीन-चार माह से स्टांप पेपर की किल्लत बनी हुई है। स्टांप वेंडर 10 रुपये वाला स्टांप 20 रुपये में और 20 रुपये का स्टांप पेपर 30 रुपये में बेच रहे हैं। वकील असलम खां ने बताया कि 50 और 100 रुपये वाले न मिलने से अधिक रेट के स्टांप पेपर लगाकर लोगों को रजिस्ट्री, बैनामा आदि कराना पड़ रहा है।
वकील मोहम्मद युनुस खां ने बताया कि अधिवक्ता कूपन (टिकट) महीनों से न होने से भी समस्या बनी हुई है। बगैर टिकट के ही काम चलाया जा रहा है। ई-स्टांपिंग शुरू न करने के पीछे कई झंझटों के अलावा कमीशन कम होने का तर्क स्टांप वेंडर दे रहे हैं। एक स्टांप वेंडर ने बताया कि पूरनपुर में छह स्टांप वेंडरों को ई स्टांपिंग के लाइसेंस मिल चुके हैं। मगर ई-स्टांपिंग में एक लाख रुपये के स्टांप बिक्री करने पर मात्र 150 रुपये ही कमीशन मिलेगा। ई-स्टांपिंग शुरू करने के लिए लैपटॉप, बिजली कनेक्शन, प्रशिक्षित कर्मचारी को भी शुरू में रखना होगा। इसमें खासा खर्चा आएगा, जिसके कारण ई स्टांपिंग शुरू ही नहीं हो पा रही है।
स्टांप पेपरों की कालाबाजारी की कोई शिकायत अब तक सामने नहीं आई है। अब किसी साधारण व्यक्ति को भेजकर स्टांप पेपरों की खरीद कराई जाएगी। अगर स्टांप पेपरों की कालाबाजारी मिली, तो संबंधित वेंडर पर कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी।
- विजय त्रिवेदी, तहसीलदार