हवाई जहाज में मनपसंद सीट पाने के लिए आपको अपनी जेब और ढीली करनी होगी।
महानिदेशालय, नागरिक उड्डयन के आदेश के बाद एक जुलाई से सभी निजी विमानन कंपनियों ने मनपसंद सीट देने के नाम पर किराया बढ़ा दिया है।
निशुल्क मिलने वाली मनपसंद सीट नए आदेश के बाद अब 200 से 750 रुपये महंगी हो गई है।
नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) अरुण मिश्र ने (आदेश संख्या टैरिफ/1/2013-एईडी) अपने आदेश में कहा है कि कई विमानन कंपनियां अपने हवाई किराये में उन सेवाओं का शुल्क भी लगा देती हैं जिनकी यात्रियों को जरूरत ही नहीं पड़ती।
जेब होगी ढीली
डीजीसीए ने सात सेवाओं का शुल्क यात्री की रजामंदी पर ही वसूलने को कहा है। इस आदेश में जहां छह सेवाओं से यात्रियों को कुछ राहत मिलेगी, वहीं एक मनपंसद सीट देने के नाम पर यात्रियों से किराये के साथ अतिरिक्त चार्ज लेने के आदेश दिए गए हैं।
पढ़ें: लखनऊ एयरपोर्ट: एक प्रिंट के देने पड़ते हैं 100 रुपए
25% सीट मनपसंद श्रेणी में
डीजीसीए ने एक विमान की खिड़की, किनारे वाली और सबसे आगे की लाइन की सीटों के लिए अतिरिक्त प्रभार वसूलने के आदेश दिए हैं।
उन्होंने यह भी कहा है कि अधिकतम 25 प्रतिशत सीटों को मनपसंद श्रेणी में दिया जा सकता है लेकिन कम किराये वाली विमानन कंपनियां इन तीनों श्रेणियों की सभी सीटों को अतिरिक्त शुल्क लेकर बेच रही हैं।
तय होगा एक फिक्स रेट
डीजीसीए ने सभी विमानन कंपनियों को मनचाही सीट देने के लिए एक दर निश्चित करने को कहा है। लखनऊ से 22 हवाई जहाजों से रोज करीब छह हजार लोग यात्रा करते हैं लेकिन मनपसंद सीट के लिए सभी में अलग-अलग शुल्क लगाया जा रहा है।
ये है राहत की बात
यदि विमानन कंपनियां पैसा लेने के बाद भी मनचाही सीट नहीं दिलवा पाईं या छह अन्य सेवाएं नहीं दे पाईं तो यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क वापस करना होगा। इतना ही नहीं, एक बार अतिरिक्त शुल्क देने पर यात्रियों से उसकी बढ़ी दर नहीं वसूली जा सकेगी।