प्रदेश के डिग्री कालेजों में 30 जून तक चार सौ से अधिक प्रवक्ताओं के पद और खाली हो जाएंगे। पहले से शिक्षकों की कमी से परेशान उच्च शिक्षा विभाग के लिए यह बड़ी परेशानी है।
इन शिक्षकों के रिटायर होने के बाद कई डिग्री कालेजों में कई प्रमुख विषयों की पढ़ाई ठप होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
प्रदेश के अशासकीय डिग्री कॉलेजों में नए शैक्षिक सत्र से कई विषयों की पढ़ाई ठप हो सकती है। इन कॉलेजों में कुछ शिक्षक बीच सत्र में भी रिटायर हो चुके थे, वह सत्र लाभ के तहत अभी शिक्षण कार्य कर रहे हैं। यह सभी शिक्षक 30 जून को रिटायर हो जाएंगे।
इनके हटते ही प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में प्रमुख विषयों के तमाम पद खाली हो जाएंगे। ऐसे में इन कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था संविदा शिक्षकों के हवाले हो जाएगी।
शिक्षकों के साथ ही डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों के भी लगभग 40 पद खाली हो रहे हैं। ऐसे में प्राचार्य विहीन हो रहे कॉलेजों की शिक्षण व्यवस्था भी बिगड़ सकती है।
प्रदेश के इन डिग्री कॉलेजों के लिए शिक्षकों का चयन उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के हवाले है। आयोग में डिग्री शिक्षकों के विज्ञापित लगभग 1500 पदों पर चयन ठप पड़ा है। इन पदों का विज्ञापन पांच वर्ष पूर्व किया गया था।
कुछ पदों पर चयन का मामला कोर्ट में लंबित होने तो कुछ पर चयन आयोग की हीलाहवाली के कारण नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग के पास पहले से ही एक हजार से अधिक खाली पद विज्ञापन का इंतजार कर रहे हैं।
अब चार सौ से अधिक पद खाली होने के बाद इनके चयन की भी जिम्मेदारी आयोग पर आ जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षकों के चयन की जिम्मेदारी निभा रहे उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में एक वर्ष से अध्यक्ष का पद खाली है।
आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. उदयराज गौतम की मौत के बाद प्रदेश सरकार की ओर से किसी अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति नहीं हो सकी है जिससे चयन का काम पूरी तरह से ठप पड़ा है। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि वर्तमान में यह आयोग अप्रासंगिक जैसा हो गया है।