सात साल से कम की सजा के मामलों में आरोपी की गिरफ्तारी न करने के कोर्ट के आदेश के चलते शोहदों को सलाखों के पीछे भेजने में नाकाम हो रही पुलिस ने अब उन्हें जिले से बाहर करने की कार्रवाई शुरू की है। एक महीने में सौ से अधिक शोहदों पर गुंडा एक्ट लगाकर उन्हें जिलाबदर कराने के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी गई है।
लगाया गया गुंडा एक्ट
एसएसपी जे रविंदर गौड़ ने जानकारी दी कि महिलाओं से छेड़खानी व चौराहे पर जमघट लगाकर गुंडागर्दी करने वाले सौ से अधिक व्यक्तियों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। एसओ तालकटोरा विनोद मिश्रा ने राजाजीपुरम के रामजी गुप्ता, ओमप्रकाश सक्सेना, कमांडो उर्फ रामदेव, प्रभात सक्सेना उर्फ संजू, कपिल उर्फ छोटू, संजय गुप्ता आदि के खिलाफ गुंडा एक्ट लगाया है।
अमीनाबाद पुलिस ने मिंटू उर्फ अमन सोनकर व गोलू सोनकर, ठाकुरगंज पुलिस ने संजय साहू, वीरेश मिश्रा, पप्पूराय, कबीर उर्फ अब्दुल मौमीन के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की। एसओ गोसाईंगंज रामबाबू यादव ने गांव मीसा के लालाराम व गांव चुरहैया के सुशील कुमार और एसओ निगोहां अरविंद कुमार पांडेय ने गुरुबख्श खेड़ा के वीरेंद्र व रमेश कुमार पर गुंडा एक्ट लगाया है।
आखिर क्यों करना पड़ा ऐसा?
इसी तरह एक महीने में सौ से अधिक लोगों पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई है। एसएसपी के मुताबिक, दुस्साहसी शोहदे चौराहे या सड़क किनारे जमघट लगाकर महिलाओं से छेड़खानी करते थे। पुलिस ने छेड़खानी के मामले भी दर्ज किए, लेकिन सात साल से कम की सजा का अपराध होने के कारण शोहदों को थाने से छोड़ना पड़ा या फिर कोर्ट में पहुंचते ही उनकी जमानत हो गई। इससे शोहदों के हौसले बढ़ रहे थे।
छेड़खानी का शिकार हो रही महिलाओं में पुलिस के प्रति नाराजगी बढ़ने लगी थी। इसके चलते शोहदों के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई करके उन्हें जिलाबदर कराने के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। शोहदों के जिला बदर होने से छेड़खानी पर अंकुश लगेगा।