मुजफ्फरनगर दंगे में छह हजार लोगों की नामजदगी ने पुलिस को उलझा रखा है। दस दिनों की मशक्कत के बाद एसआईटी की जांच में गुनहगार और बेगुनाहों के नाम सामने आ चुके हैं।
21 नवंबर के बाद आईजी आशुतोष पांडेय इनकी सूची जारी करेंगे। यह इसलिए किया जा रहा है ताकि पुलिस बेगुनाहों से कोई वसूली न कर पाए।
मुजफ्फरनगर दंगे में हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में 541 मुकदमे दर्ज कराए, जिनमें दोनों समुदायों के छह हजार लोगों को नामजद कराया गया था। इतनी बड़ी नामजदगी प्रदेश में एक रिकार्ड है। फर्जी नामजदगी को लेकर जिले भर में विरोध-प्रदर्शन हुए। महिलाएं सड़कों पर उतर आईं।
आईजी के निर्देश पर एसआईटी और संबंधित थानों की पुलिस ने फर्जी नामजदगी की जांच शुरू की। एसआईटी की टीम ने तथ्यों के लिए बाकायदा वीडियोग्राफी भी की है। जांच अंतिम चरण में है। मुकदमों में दोनों समुदाय के जो लोग फर्जी तरीके से नामजद किए गए थे, उन्हें चिह्नित कर लिया गया है।
मुकदमे में ऐसे लोग भी जोड़ दिए गए, जो देश के दूसरे हिस्सों में नौकरी कर रहे हैं। उन्माद के सूत्रधारों ने नामजदगी में भी सियासी दांवपेंच नहीं छोड़ा। एसआईटी की जांच में गुनहगार भी सामने आ गए हैं।
कोर्ट के फैसले पर निगाहें
सुप्रीम कोर्ट में जारी जनहित याचिका पर भी एसआईटी की निगाहें टिकी हैं। मेरठ की जाट महासभा द्वारा यह याचिका दाखिल की गई है।
इस मामले की सुनवाई 21 नवंबर को होगी। दंगे की सीबीआई जांच कराई जाए या नहीं, इस पर भी फैसला होना है।
यदि जांच सीबीआई को गई तो राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की विवेचना बीच में ही रुक जाएगी।