शरणार्थी शिविरों में बुखार से बच्चों की मौत की खबरों पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद प्रशासन-स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची है।
बृहस्पतिवार को अफसरों ने राहत शिविरों की ओर दौड़ लगाई। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने न केवल शिविरों में डेरा डाल दिया है बल्कि सरकारी अस्पतालों में भी शरणार्थियों के लिए दो बेड रिजर्व कर दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से सबसे ज्यादा खलबली स्वास्थ्य विभाग में है। अफसरों को डर है कि कहीं इसकी गाज उन पर न गिर जाए, लिहाजा सभी राहत शिविरों में डॉक्टरों की टीम तैनात कर दी गई है।
बृहस्पतिवार को राहत शिविरों में चिकित्सकों की टीम दिन भर डेरा डाले रही। मेडिकल अफसरों के अलावा डिप्टी सीएमओ ने शिविरों की व्यवस्थाओं को देखा। मलकपुरा राहत शिविर संचालकों द्वारा 25 मृतक बच्चों की सूची दी गई थी लिहाजा इस शिविर पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
सीएमओ लोकेश गुप्ता ने बताया कि राहत शिविरों में विभाग द्वारा चिकित्सा सुविधा पहले से ही दी जा रही थी, लेकिन अब इसे और बेहतर कर दिया गया है। जनपद में चल रहे चारों शिविरों में रहने वाले 0-18 वर्ष के बच्चों की सूची तैयार की जा रही है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं की सूची भी तैयार हो रही है ताकि इनका नियमित टीकाकरण और पल्स पोलियो की दवा पिलाई जा सके।
शिविर या उसके नजदीक एक-एक एंबुलेंस की व्यवस्था की जा रही है ताकि गंभीर मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाकर भर्ती किया जा सके। सभी स्वास्थ्य केंद्र-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर शरणार्थियों के लिए दो-दो बेड रिजर्व कर दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार शासन ने मेरठ मंडल के कमिश्नर को आदेश जारी कर मुजफ्फरनगर-शामली के शरणार्थी शिविरों का दौरा करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन ऐन वक्त पर उनके शामली आने का कार्यक्रम टल गया। बताया गया कि मुजफ्फरनगर में अधिक देर हो जाने की वजह से वह लौट गए, संभवत: एक दो दिन में वह फिर से यहां का दौरा करेंगे।