गैंगेस्टर में बनत के दो भाईयों को छह-छह साल की सजा
शामली के बनत कसबे में सिपाही की हत्या के प्रकरण में दो अभिुयक्तों को गैंगेस्टर की धारा में छह-छह साल की सजा सुनाई गई। 29 साल पहले बस स्टैंड पर सरेआम सिपाही की हत्या की वारदात अंजाम दी गई थी। गैंगेस्टर कोर्ट के न्यायाधीश बाबूराम ने फैसला सुनाया।
अभियोजन अधिकारी संदीप सिंह और विशेष लोक अभियोजक दिनेश सिंह पुंडीर ने बताया कि शामली जिले के आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के बनत कसबे में 1993 में हत्या की गई थी। वादी कासिम अली पुत्र रफीक अहमद का भाई मुबारिक अली उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही था और उसकी तैनाती गाजियाबाद में थी। बीमारी के कारण सिपाही छुट्टी पर बनत स्थित घर आया हुआ था।
वारदात के दिन मुबारिक बनत में बस अड्डे पर नसीम की दुकान पर बैठा हुआ था। सुबह 11 बजे गांव के ही करम अली, मौसम अली और सलाउद्दीन पुत्र फरजुद्दीन ने गोली मारकर सिपाही की हत्या कर दी थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष आदर्श मंडी शैलेन्द्र भारद्वाज ने इन तीनों भाईयों का गैंगेस्टर में चालान किया था। ट्रायल के दौरान अभियुक्त मौसम अली की मृत्यु हो गई।
अभियुक्त करम अली और सलाउद्दीन को हत्या में सजा हो चुकी थी, लेकिन इन दिनों वह जमानत पर चल रहे थे। गैंगेस्टर के मामले में गैंगेस्टर कोर्ट के न्यायाधीश बाबूराम ने दोनों सगे भाईयों को 6-6साल का कठोर सजा और 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सुनाई है। जुर्माना न देने पर एक एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।