सुषमा के हौसले से योगेश को मिली नई जिंदगी
मुजफ्फरनगर। अपनों के साथ हो तो मुश्किल से मुश्किल वक्त भी कट जाता है। हौसले, सूझबूझ और कुछ कर गुजरने की चाह से अपनों की जिंदगी बच जाती है। अंगदान भी इसी कड़ी का हिस्सा है। खतौली की सुषमा ने किडनी देकर अपने छोटे भाई योगेश को नई जिंदगी देने का काम किया था।
आवास विकास खतौली निवासी स्वर्गीय यशवीर सिंह राणा के परिवार में बड़ी बेटी सुषमा राणा, बेटे योगेश राणा और अश्वनी राणा है। 2014 में अचालक योगेश को किडनी की समस्या हुई। परिवार बेहद मुश्किल स्थिति में था। ऐसे में घर की बड़ी बेटी सुषमा ने आगे आकर हौसला दिखाया और भाई को किडनी देकर समाज के लिए नई मिसाल पेश की। योगेश का कहना है कि बहन दिल्ली में रहती है। उसके लिए बहन ने जो किया, उसकी व्याख्या शब्दों से नहीं हो सकती। बहन बड़ी थी तो पूरे परिवार को संभालकर हौसला दिया।
सेवानिवृत्त अध्यापक ने दान की थी आंखें
खतौली कसबे में एक सेवानिवृत अध्यापक की मृत्यु हो गई थी। उनके मरने के बाद उनकी आंखे ऋषिकेश में स्थित हॉस्पिटल में दान दी थी।
अचपल ने दान कर दिया था शरीर
शाहपुर क्षेत्र के गांव गढ़ी बहादुरपुर में डेरा सच्चा सौदा के 85 वर्षीय अनुयायी अचपल ने मरणोपरांत अपना शरीर दान करने का प्रण लिया था। उनकी मौत के बाद परिवार ने मेडिकल कॉलेज बेगराजपुर में मेडिकल शोध के लिए दे दिया था।
बेटे के लिए दान किया था गुर्दा
सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने बताया कि मार्च महीने में गांधी कॉलोनी निवासी विमल कुमार ने अपने बेटे के लिए गुर्दा दान करने की अनुमति ली थी। टीम ने मेडिकल जांच के लिए यह अनुमति दे दी थी।
मृत्यु के बाद दान कर दी जाए हमारी देह
आदर्श कॉलोनी निवासी बैंककर्मी केएल अग्रवाल (80) और उनकी पत्नी कमलेश अग्रवाल (77) ने मृत्यु के बाद देह दान का फैसला लिया है। इसके लिए उन्होंने सभी औपचारिकताएं भी पूरी कर रखी है। दंपती के बेटे सुनील अग्रवाल ने बताया कि माता-पिता ने स्वेच्छा से यह कदम उठाया हुआ है।