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महाराष्ट्र में काम कर रहे सैकड़ो लोग जिले में पहुंचे

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महाराष्ट्र में लॉकडाउन से लौटने लगे कामगार
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मुजफ्फरनगर। महाराष्ट्र में लॉकडाउन होने के बाद जिले के सैकड़ों लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। रात्रि में यहां आई गोल्डन टेंपल, सुबह आई बांद्रा और दोपहर में आई कोच्ची वैली एक्सप्रेस से लोग यहां पहुंचे। स्टेशन पर अधिकतम लोगों की थर्मल स्कैनिंग कराई गई है।
जिले के काफी संख्या में लोग रोजी-रोटी के लिए हजारों की संख्या में महाराष्ट्र में रहते हैं। इनमें शहर के खालापार, किदवईनगर, लद्दावाला, महमूदनगर, सरवट के साथ ही जिले के बुढ़ाना, शाहपुर, जानसठ और पुरकाजी क्षेत्र के लोग हैं। महाराष्ट्र में कोरोना महामारी को देखते हुए यातायात व्यवस्था और बाजार पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। कोरोना बीमारी से बचने और परिवार वालों के बुलावे के चलते महाराष्ट्र में काम करने वाले ये सभी लोग अपने घर लौट रहे हैं। शनिवार की रात गोल्डन टेंपल से काफी संख्या में ये लोग यहां पहुंचे। सुबह के समय देहरादून-बांद्रा और दोपहर को कोच्ची वैली ट्रेन से बड़ी संख्या में जिले में आए। अकेले कोच्ची वैली में इनकी संख्या 400 से अधिक थी। किदवईनगर के राशिद ने बताया कि वह सीधे मुंबई से आ रहे हैं, वहां पर पाइप लाइन बिछाने के काम में लगे थे, अब सब काम बंद हो गए हैं। इसके बाद सभी लोग वापस आ गए हैं। बुढाना के रहने वाले इमरान ने बताया कि मुंबई में जिले के लोग ऑटो चलाने, बेकरी, फिल्मी स्ट्रेडियो में मजदूरी करते हैं। यहां के लोगों के बड़ी संख्या में वहां सैलून हैं। लद्दावाला के अरबाज ने बताया कि वह वहां सैलून में काम करता है। महाराष्ट्र में बीमारी के अधिक फैलने से परिवार के लोग परेशान थे। अधिकतम लोग महाराष्ट्र से अपने घरों पर आ रहे हैं। दो-तीन दिन से महाराष्ट्र से लोग यहां आ रहे हैं। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि जो भी यात्रि ट्रेनों से आए हैं, उन सबकी थर्मल स्कैनिंग की गई है।
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बिजनौर के करीब सैकड़ों लोग यहां रुके
मुजफ्फरनगर। देहरादून-बांद्रा और कोच्ची वैली से महाराष्ट्र से आकर रेलवे स्टेशन उतरने वालों में बिजनौर जिले के भी करीब एक सौ लोग शामिल रहे। सुबह के समय बांद्रा से बिजनौर के लगभग 50 लोग आए, इतने ही कोच्ची वैली से यहां पहुंचे। जो बिजनौर के अलावा धामपुर, नगीना, कोतवाली, अफजलगढ़ के कसबे के रहने वाले है। सुबह के समय यहां पहुंचने वालों को रोटी-पानी के लिए खालापार मौहम्मद फैसल, असदजमा, जावेद कंवर, नबील अंसारी, हाजी अहसान, अरसद सम्राट, मशरुफ अली त्यागी आदि अपने साथ ले गए, जहां जौहडी वाली मस्जिद में उन्हें भोजन कराया गया। इन्हें यहां पर ठहराया गया है, जिन्हें सोमवार सुबह बिजनौर भेजा जाएगा। नगीना के वहाजुद्दीन और आकिल ने बताया कि वे महाराष्ट्र में ऑटो चलाते हैं। बिजनौर के भी सैकड़ों लोग मुंबई में मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार चलाते हैं।
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