डिस्पेंसिंग मशीन से डीजल की बिक्री, ड्रम से दिया जाता था पेट्रोल
अवैध पेट्रोल पंप पर जमीन में जो टेंक मिला है, वह केवल डीजल का बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, पंप संचालक द्वारा पेट्रोल पंप पर लगी मशीन से केवल डीजल की बिक्री की जाती थी, जबकि पेट्रोल वहां से कुछ दूरी पर एक ड्रम में रखकर मापक यंत्र से दिया जाता था।
कहां से आता था डीजल
आपूर्ति विभाग के सामने अभी जांच के कई बिंदु हैं। सबसे पहला और अहम बिंदू ये है कि आखिर इस अवैध पंप पर डीजल कहां से सप्लाई हो रहा था। क्योंकि पेट्रोलियम कंपनी से यदि डीजल सप्लाई हो रहा था, तो यह भी बड़ी जांच का विषय है कि आखिर अवैध पंप पर सप्लाई किस नियम के तहत दी जा रही थी। यदि पेट्रोलियम कंपनी से डीजल नहीं आ रहा था, तो क्या डीजल चोरी का था? या फिर एक बार फिर से मिलावटी तेल के कारोबार ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। क्योंकि मिलावटी तेल के कारोबार को लेकर मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली में कई मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं। 2019 में तो मेरठ में बड़ी कार्यवाही मिलावटी तेल के खिलाफ हुई थी। उसी दौरान मुजफ्फरनगर और शामली में भी छापामारी हुई थी।
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अब तक आधा दर्जन अवैध पंप सील
जनपद में जिला पूर्ति विभाग द्वारा अब तक आधा दर्जन अवैध पेट्रोल पंप सील किए जा चुके हैं, जिनके खिलाफ मुकदमे भी पंजीकृत कराए गए हैं। हालांकि, इससे पहले पकड़े गए अधिकांश अवैध पंप बायोडीजल पंप के नाम पर संचालित किए जा रहे थे। जनपद में शहर से सटे गांव में यह पहला अवैध पंप पकड़ा गया है, जो सीधे तौर पर अनाधिकृत रूप से पेट्रोल-डीजल की खुलेआम बिक्री कर रहा था।
जनपद में सभी पेट्रोल पंपों पर चलेगा अभियान
जनपद में अवैध पेट्रोल पंप संचालन का खुलासा होने के बाद डीएम चंद्रभूषण सिंह ने जिला पूर्ति विभाग और बांट-माप विभाग के साथ ही ऑयल कंपनियों के अफसरों की टीम गठित की है। यह टीम शहर क्षेत्र में सिटी मजिस्ट्रेट और तहसील क्षेत्रों में संबंधित एसडीएम के नेतृत्व में जनपद के सभी पेट्रोल पंपों का निरीक्षण करेगी। इस दौरान अपमिश्रण, घटतौली और जनसामान्य को दी जाने वाली सुविधाओं की जांच की जाएगी। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल के नमूने भी लिए जाएंगे।