खूब लड़े सौरभ पर अनुसूचितों ने शहर में खिलाया कमल
मुजफ्फरनगर। सदर सीट पर भाजपा फिर अजेय साबित हुई। रालोद-सपा गठबंधन के प्रत्याशी सौरभ स्वरूप बंटी ने 2017 का चुनाव लड़े अपने भाई गौरव स्वरूप से अधिक वोट लिए, लेकिन वह जीत की दहलीज तक नहीं पहुंच सके। अनुसूचित जाति के वोटों में बिखराव का लाभ भाजपा को मिला। बसपा प्रत्याशी को सिर्फ 10733 वोट मिले।
मुजफ्फरनगर सदर सीट पर पहली बार 1991 में भाजपा का खाता खुला था। पिछले तीन दशक में हुए नौ में से सात चुनाव में भाजपा को जीत मिली है। विधायक कपिल देव अग्रवाल ने जीत की हैट्रिक लगाई है। जीत के बाद वैश्य राजनीति में उनका कद बढ़ा है। कपिल के सामने 2017 का चुनाव सपा के टिकट पर गौरव स्वरूप ने लड़ा था। इस बार रालोद के टिकट पर उनके भाई सौरभ स्वरूप मैदान में थे। सौरभ ने अपने भाई गौरव से 5966 वोट अधिक हासिल किए, लेकिन वह भी जीत नहीं सके। चुनाव में अनुसूचित वर्ग का वोट निर्णायक रहा।
2017 में बसपा से चुनाव लड़े राकेश शर्मा को 21 हजार 38 वोट मिले थे, जबकि इस बार पुष्पांकर दीपक को सिर्फ 10733 वोट मिले। 10305 वोट बसपा के खाते में कम हो गए। यही नहीं शहर के अनुसूचित जाति की अधिकता वाले बूथों पर भाजपा ने वोट हासिल किए। रैदासपुरी, गंगारामपुरा, हंडिया मोहल्ला के सिर्फ दो बूथों पर बसपा आगे रही, बाकी बूथों पर दो अंकों तक भी नहीं पहुंच सकी। भाजपा को यहां खूब वोट मिले।
31 साल में दो बार चितरंजन ने हराई भाजपा
भाजपा का गढ़ बनी शहर सीट पर पिछले 31 साल में हुए चुनाव का रिजल्ट बताता है कि पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप ने दो बार भाजपा का विजय रथ रोका है। सपा के टिकट पर 2002 और 2012 में चितरंजन ने जीत दर्ज की थी। 2016 के उपचुनाव और 2017 में चितरंजन के बेटे गौरव स्वरूप कपिल देव से हार गए, जबकि 2022 में उनके दूसरे बेटे सौरभ को हार का सामना करना पड़ा।
सिर्फ एक बार मुस्लिम बना विधायक
मुजफ्फरनगर सदर सीट से सिर्फ एक बार ही मुस्लिम जीतकर विधानसभा पहुंचा। बीकेडी के टिकट पर 1969 में सईद मुर्तजा ने सदर विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। 1985 के बाद शहर सीट पर कांग्रेस भी नहीं जीत सकी है। रालोद का अब तक यहां खाता नहीं खुला।
- 2017 के विधानसभा में इस तरह पड़े थे वोट
कपिल देव अग्रवाल, भाजपा 97838
गौरव स्वरूप, सपा 87134
पायल माहेश्वरी, रालोद 5640
राकेश शर्मा, बसपा 21038
- 2022 में सदर सीट पर इस तरह मिले मत
कपिल देव अग्रवाल, भाजपा 111794
सौरभ स्वरूप बंटी, रालोद 93100
पुष्पांकर दीपक, बसपा 10733
सुबोध शर्मा, कांग्रेस 1694
टिकट को लेकर स्वरूप परिवार में तकरार
विधानसभा चुनाव से पहले टिकट को लेकर स्वरूप परिवार में तकरार हुई। सौरभ स्वरूप को टिकट मिला तो गौरव स्वरूप भाजपा में शामिल हो गए थे। हालांकि चुनाव के दौरान वह खामोश रहे और प्रचार में नजर नहीं आए। इसके बाद स्वरूप परिवार एकजुट होकर सौरभ के पक्ष में खड़ा हो गया।
प्रेमपुरी में नहीं चल पाया हैंडपंप
शहर के प्रेमपुरी क्षेत्र में भी हैंडपंप नहीं चल पाया। बूथ संख्या 85 पर रालोद को सिर्फ 10 वोट मिले। रामलीला टिल्ला क्षेत्र में भाजपा का जादू चला। जनकपुरी, रामपुरी, आनंदपुरी में पाल बिरादरी के क्षेत्र में भी बसपा के पुष्पांकर पाल वोट कम हासिल कर पाए, जिसका नतीजों पर असर पड़ा।
सौरभ स्वरुप।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
कपिलदेव।- फोटो : MUZAFFARNAGAR