बुढ़ाना क्षेत्र में गन्ने के खेत में आई टॉप बोरर की बीमारी का निरीक्षण करते अधिकारी।
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। गन्ना शोध केंद्र मुजफ्फरनगर के वैज्ञानिकों, गन्ना विभाग और चीनी मिलों के अधिकारियों की टीम ने किसानों के गन्ने के खेत का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने किसानों को गन्ने की फसल में आई बीमारी टॉप बोरर और अन्य कीटों के प्रकोप से फसल बचाने के उपाय बताए।
कस्बा तथा देहात क्षेत्र में गन्ने की फसल पर टॉप बोरर सहित अन्य कीट व रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। शनिवार को गन्ना शोध केंद्र मुजफ्फरनगर के संयुक्त निदेशक डॉ. वीरेश सिंह, कीट वैज्ञानिक डॉ. नीलम, जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी, खांडसारी अधिकारी चंद्रशेखर सिंह, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक बुढ़ाना संजय कुमार सिंह, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक मंसूरपुर बृजेश कुमार राय, चीनी मिल बुढ़ाना के इकाई उपाध्यक्ष राज सिंह चौधरी, महाप्रबंधक (गन्ना) देवेंद्र सिंह व उनकी टीम तथा चीनी मिल खतौली के उप महाप्रबंधक (गन्ना) व उनकी टीम बुढ़ाना पहुंची।
टीम ने कस्बा शाहपुर के किसान कुलदीप सिंह व धनकुमार, ग्राम मदीनपुर के किसान रामकुमार व महिपाल तथा ग्राम अलीपुर अटेरना के किसान सतवीर सैनी व अजीत के गन्ना पेड़ी और पौधे के खेतों का स्थलीय निरीक्षण किया। गन्ने की फसल में टॉप बोरर कीट के प्रभाव की स्थिति का आंकलन किया।
डॉ. वीरेश सिंह ने बताया कि किसान ऐसे प्रभावित पौधे, जिसमें टॉप बोरर कीट की सुंडी गन्ने के तने में छेदकर घुस गई है। उस तने को काटकर नष्ट करना बेहतर उपाय है। ताकि इससे कीट की अगली पीढ़ी उत्पन्न न हो सके। वर्तमान में जो पेड़ी अथवा फरवरी/मार्च में बोई गई गन्ने की पौध खड़ी है, उन खेतों में कलोरेन्ट्रेनीलीप्रोल रसायन वाले कीटनाशक जैसे कोराजन अथवा फरटेरा की 150 मिली लीटर मात्रा को 400 लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करें। इस टीम ने उपस्थित किसानों को गन्ने की फसल को विभिन्न रोग से बचाने के उपाय बताए।