जिले में गन्ने की खेती इस साल बूम पर है। गन्ने की अरली वैरायटी 0238 के कारण इस बार उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत बढ़ गया है। गन्ने की उपज बढ़ने से किसानों के सामने मिल की पर्ची का संकट खड़ा हो गया है।
गन्ना विभाग किसानों का बेसिक कोटा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। 15 अप्रैल से पहले बंद होने वाली चीनी मिलों के इस बार 15 मई तक चलने की उम्मीद है। किसानों की जहां बल्ले-बल्ले हो रही है वहीं चीनी मिलों में भी रिकवरी में रिकार्ड बढ़ोतरी हुई है।
जनपद में किसान एक लाख 31 हजार 954 हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की खेती कर रहे हैं। गन्ने की खेती में तेजी के साथ आए बदलाव में किसानों ने शीघ्र प्रजाति का प्रयोग शुरू कर दिया है। 84.39 प्रतिशत किसान गन्ने की नई प्रजाति 0238, 3234 और 98014 का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें 0238 का प्रयोग सर्वाधिक है।
केवल 15.12 प्रतिशत किसान ही सामान्य गन्ने की पैदावार कर रहे हैं, जबकि रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना जिले में मात्र 0.49 प्रतिशत रह गया है। 0238 ने जिले में गन्ने की खेती में बूम ला दिया है। जिन खेतों में 45 से 50 क्विंटल बीघे का उत्पादन था, उनमें इस बार 65 से 70 क्विंटल प्रति बीघा तक पहुंच गया है।
चीनी मिलें किसानों को उनके पुराने कोटे के हिसाब से पर्ची जारी कर रही हैं। ऐसे में उनके सामने अतिरिक्त गन्ना डालने का संकट पैदा हो गया है। किसान कोटा बढ़ाते हुए पर्ची बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। गन्ने का उत्पादन इस बार जिले में 15 से 20 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान गन्ना विभाग लगा रहा है।
उत्पादन बढ़ने से जहां किसानों के चेहरे खिले हैं, वहीं चीनी मिलों में भी रिकवरी बढ़ गई है। जिले में चीनी की रिकवरी जहां नौ से दस प्रतिशत के बीच रहती थी, वहीं इस बार यह 11 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने का अनुमान है। अब तक हुई पेराई में यह 10.48 प्रतिशत है।
शुरू में कम रिकवरी रहने के बाद इस समय यह रुटीन में 11.49 प्रतिशत पर चल रही है। 11 जनवरी की खतौली चीनी मिल की रिकवरी 12.02 प्रतिशत पहुंच गई। अपने आप में यह एक रिकार्ड है। गन्ना शोध केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉ. वीरेश सिंह का कहना है कि ऐसी बहुत कम वैरायटी सामने आती हैं, जिसमें उत्पादन और रिकवरी दोनों बढ़ें। 0238 ऐसी ही वैरायटी है। गन्ना विभाग अभी ओर शोध कर रहा है। जल्द ही 5191 और 8272 भी किसानों को उपलब्ध होगी, इनमें बीमारी कम रहेंगी।
किसानों का कोटा बढ़ाएंगे : डीसीओ
जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश यादव का कहना है कि इस बार जिले में गन्ने का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। किसानों की समस्त गन्ने की आपूर्ति उनका कोटा बढ़ाकर चीनी मिलों को कराई जाएगी।
चीनी मिल सामान्यत: 15 अप्रैल तक पेराई बंद कर देती थीं, इस बार गन्ना अधिक होने के कारण इनके 15 मई तक चलने की संभावना है। डीसीओ का कहना है कि रिकवरी बढ़ने से चीनी मिलों को भी लाभ हुआ है। उत्पादन और रिकवरी में जिले ने रिकार्ड कायम किया है।
53 लाख कुंतल अधिक गन्ने की पेराई हुई
जिले की सभी आठ चीनी मिलों में बीते वर्ष 11 फरवरी तक 462 लाख कुंतल गन्ने की पेराई हुई थी। इस बार बंपर पैदावार के कारण 11 फरवरी तक चीनी मिले 515 लाख कुंतल गन्नेे की पेराई कर चुकी हैं।
मिलों में डाला 16 अरब 45 करोड़ का गन्ना
जिले की आठ चीनी मिलों में किसान अब तक 16 अरब 45 करोड़ 97 लाख का गन्ना डाल चुके हैं। चीनी मिलें किसानों को 12 अरब छह करोड़ 91 लाख का भुगतान भी कर चुकी हैं। चीनी मिलों पर किसानों का चार अरब 39 करोड़ पांच लाख बकाया है।
इसमें 14 दिन से ऊपर की अवधि का भी दो अरब 14 करोड़ 88 लाख बकाया है। अकेली भैसाना चीनी मिल पर 14 दिन से ऊपर का एक अरब 36 करोड़ 54 लाख बकाया है। इसके बाद खाईखेड़ी पर 25 करोड़ 19 लाख बकाया है। केवल टिकौला ही ऐसी मिल है, जो 14 दिन के अंदर लगातार भुगतान कर रही है।