प्रदेश सरकार दे चुकी 79 मुकदमे वापसी की मंजूरी
मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार मुजफ्फरनगर दंगों और भाजपा नेताओं पर दर्ज मुकदमों समेत 79 मुकदमों को वापस लेने की मंजूरी दे चुकी है। इस संबंध में जनपद की अदालतों में प्रार्थना पत्र दिए गए है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भाजपा नेताओं की मुश्किल बढ़ गई है, क्योंकि अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए है कि जन प्रतिनिधियों के मुकदमे वापसी में हाई कोर्ट की मंजूरी जरुरी है।
भाजपा नेताओं ने फरवरी 2018 को सीएम योगी से मिल कर दंगे के 175 मुकदमों में से 92 मुकदमों की लिस्ट सीएम को सौंपी थी। जिसमें कहा गया था कि ये मुकदमे डकैती, आगजनी के है, जो लोगों पर फर्जी दर्ज कराए गए है। शासन ने स्थानीय प्रशासन से इस मुकदमों की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली थी। प्रशासन की रिपोर्ट के बाद शासन ने दंगों के इन मुकदमों को वापस लेने की मंजूरी देना शुरू किया। सीआरपीसी की धारा 321 के तहत सरकार ने मुकदमे वापस लेने की अनुमति दी।
बीते ढाई साल में सरकार 79 मुकदमों का वापस लेने की मंजूरी दे चुकी है। इस दौरान राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, गन्ना मंत्री सुरेश राणा आदि ने भी अपने मुकदमों को वापस लेने की मंजूरी करवा ली। हालांकि कपिल देव अग्रवाल आदि के मुकदमे वापस नहीं हो सके। इस बीच कोर्ट ने फरवरी माह में गन्ना मंत्री सुरेश राना, सरधना विधायक संगीत सोम, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, साध्वी प्राची समेत 11 लोगों के खिलाफ नंगला मंदौड की पंचायत में भड़काऊ भाषण देने के मुकदमे के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए मुकदमा वापस लेने की सहमति दे दी थी। इसके अलावा अन्य कोई मुकदमे का प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं हुआ है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट की मंजूरी मुकदमे वापसी के लिए जरूरी हो गई है। इससे भाजपा नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि शासन अभी तक 79 मुकदमों को वापस लेने की मंजूरी दे चुका है। इस संबंध में लोवर कोर्ट और सेशन में प्रार्थना पत्र दिए गए है।