चरथावल के गांव कसौली निवासी ओमपाल ने एंटी करप्शन सहारनपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि शहर में आर्य समाज से जुड़े धोखाधड़ी के झूठे मामले में फाइनल रिपोर्ट के नाम पर एसएसआई दो लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा है। पीड़ित की ओर से पिछले महीने 29 जून को शिकायत की गई। एंटी करप्शन टीम के प्रभारी कुशलवीर सिंह ने बुधवार को 12 सदस्यीय टीम के साथ जाल बिछाया। शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपये देकर थाने भेजा।
आरोपी एसएसआई उसे थाने में मालखाने के पास ले गया और रुपये पकड़ लिए। एंटी करप्शन टीम ने घेरकर एसएसआई को हिरासत में ले लिया। शिकंजे में फंसते ही आरोपी इधर-उधर भागने लगा। थाने में हंगामे की स्थिति बन गई। टीम ने आरोपी को काबू कर हाथ धुलवाए तो पानी का रंग लाल हो गया।
इसके बाद टीम आरोपी को लेकर सिखेड़ा थाने पहुंची। शिकायतकर्ता और आरोपी को आमने-सामने बैठा कर पूछताछ की। दोनों के वीडियो बयान दर्ज किए गए। निरीक्षक मुकेंद्र कुमार की तरफ से भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। बुलंदशहर के सैदपुर पड़ाव के रहने वाले आरोपी को बृहस्पतिवार को सहारनपुर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम न्यायालय में पेश किया जाएगा।
थाने में उपनिरीक्षक के साथ शुरू हुई खींचतान से एकाएक पुलिसकर्मी कुछ समझ नहीं पाए। मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। टीम सिखेड़ा थाने के लिए रवाना हुई। एडीजी भानु भास्कर ने मामले की जानकारी ली। इसके बाद एसएसपी संजय कुमार वर्मा भी सिविल लाइन थाने पहुंचे। उन्होंने थाना प्रभारी इंद्रजीत सिंह से जानकारी ली।
ये बोले एसपी
एंटी करप्शन की सहारनपुर टीम ने आरोपी एसएसआई प्रवीण शर्मा को सिविल लाइन थाने से पकड़ा है। सिखेड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई हैं।
- अमृत जैन, एसपी सिटी
ये था मामला
दूधली निवासी मुकेश आर्य ने चार मार्च 2025 को सिविल लाइन थाने में कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह शहर आर्य समाज के निर्वाचित प्रधान हैं। कसौली निवासी ओमपाल धोखाधड़ी से फर्जी कागजात तैयार करने के मामले में जेल जा चुका है। उसने पुन: आर्य समाज प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश लखनऊ के कथित मंत्री प्रयागराज निवासी पंकज जायसवाल की ओर से जारी पत्र के आधार पर खुद को शहर आर्य समाज का प्रशासक, ज्ञानेंद्र सिंह मलिक को सह प्रशासक, सतीश, भानु प्रताप सिंह, गजेंद्र सिंह श्रवण सिंह व अन्य को सलाहकार दर्शाया।
एसएसआई प्रवीण शर्मा इस मामले की जांच कर रहे थे। उधर, आरोपी ओमपाल सिंह का कहना है कि उपनिरीक्षक प्रवीण शर्मा को दो बार यह जांच मिली। फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर उनसे दो लाख रुपये मांगे गए थे।
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