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चौधरी चरण सिंह की जयंती पर विशेष : किसानों की पीड़ा को अपनी समझते थे चौधरी साहब

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खतौली में एक कार्यक्रम के दौरान चौधरी चरण सिंह। फाइल फोटो - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। किसान मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की यादें और बातें किसानों के दिलों में हैं। जिक्र छिड़ते ही सियासत में ईमानदारी के लिए चौधरी साहब का नाम किसान सबसे पहले लेते हैं। हर किसान की पीड़ा को वह अपनी समझते थे। चकबंदी कानून से लेकर गांव-गांव खोले गए शिक्षण संस्थानों से उन्होंने शिक्षा की अलख जगाने का कार्य भी किसानों के लिए किया था।
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पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान बताते हैं कि चौधरी साहब से पहली मुलाकात 1971 के लोकसभा चुनाव के दौरान ही हुई थी। शिक्षित युवाओं और अधिवक्ताओं को वह आगे बढ़ाते थे। ईमानदारी से कार्य करने और भ्रष्टाचार का खात्मा करने की सीख देते थे। छात्र जीवन में उनसे जुड़े तो हमेशा उन्हीं के साथ रहे। सियासत में वह ईमानदारी का सूर्य थे।
लक्ष्मण विहार में रह रहे और मूल रूप से अलावलपुर माजरा निवासी ब्रह्म सिंह बताते हैं कि भारतीय क्रांति दल के 1971 के इलाहाबाद अधिवेशन में चौधरी चरण सिंह से पहली मुलाकात हुई थी। मंच से कहा था कि व्यक्तिगत जीवन और सार्वजनिक जीवन एक जैसा होना चाहिए। राजनीति को कभी आमदनी का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। बेहतर शिक्षा और ईमानदार व्यवस्था सच्चे राष्ट्र का निर्माण करती हैं।
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तीन दिन जेल में बिताकर लौटे थे
जानसठ। आपात काल के दौरान बसायच निवासी कैलाश चंद (075) कबीर दिल्ली के शिवाजी स्टेडियम की अस्थायी जेल में तीन दिन बंद रहे थे। वह बताते हैं कि चौधरी चरण सिंह की गिरफ्तारी के बाद बीकेडी कार्यकर्ता जंतर-मंतर लिए रवाना हुए थे, लेकिन रास्ते में कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। बड़े चौधरी ईमानदारी के पक्षधर थे और सच्चे कार्यकर्ताओं का सम्मान करते थे। संवाद
काकड़ा से हाथी पर सवार होकर पहुंचे थे शाहपुर
शाहपुर। किसान मसीहा स्वर्गी चौधरी चरण सिंह कस्बे के किसान नेता स्वर्गीय इलम चंद आर्य के घर कई बार आए थे। इलम चंद आर्य के पुत्र चौधरी छोटूराम डिग्री कॉलेज से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सत्यवीर आर्य ने बताया कि उनके पिता और किसान मसीहा के बीच गहरी मित्रता थी। गांव काकड़ा से हाथी पर बैठाकर चौधरी साहब को शाहपुर तक लाए थे। संवाद
खतौली पालिका के भवन का किया था उद्घाटन
खतौली। रालोद नेता धर्मेंद्र तोमर बताते हैं कि साल 1971 में किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह खतौली के सीताशरण इंटर कॉलेज में आना हुआ था। तब हमारे पिता स्वर्गीय बाबूराम तोमर पीटीआई थे। खतौली नगर पालिका के चेयरमैन ओर कालेज के प्रबंधक ओमप्रकाश गुप्ता चौधरी साहब के नजदीकियों में से थे। 30 जून, 1977 खतौली नगरपालिका का नवीन भवन का उद्घाटन चौधरी साहब ने ही किया था, तब चेयरमैन जगदीश राय गोयल थे। संवाद
नाई ने बताया, बालियान तुम्हारा टिकट हो गया
पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान बताते हैं कि वह टिकट के लिए 12 तुगलक रोड पहुंचे। तब चौधरी साहब हजामत बनवा रहे थे। कुछ देर बातें हुई, सवाल-जवाब भी किए गए। वह बाहर निकले तो स्कूटर पर पीछे से एक व्यक्ति पहुंचा, मुझे रोका और बोला की बालियान खतौली से तुम्हारा टिकट हो गया है। मैने देखा कि यह तो वही व्यक्ति है, जो चौधरी चरण सिंह की हजामत बना रहा था। खुशी-खुशी घर लौटा था।
मुजफ्फरनगर से लड़ा था पहला चुनाव
प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पदों पर रहने के बाद किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह ने लोकसभा का पहला चुनाव बागपत से नहीं, बल्कि मुजफ्फरनगर से लड़ा था। 1971 के इस चुनाव में वह हार गए थे। इसके बाद उन्होंने प्रत्येक चुनाव बागपत से लड़ा। मुजफ्फरनगर जिले की तब दूसरी लोकसभा सीट कैराना से उनकी पत्नी गायत्री देवी सांसद चुनी गई थी।
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