चरथावल (मुजफ्फरनगर)। महान कर्मयोगी एवं स्वतंत्रता सेनानी आचार्य अभयदेव की योग साधना से महात्मा गांधी सम्मोहित थे। पहली बार उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से गुजरात के साबरमती आश्रम में हुई, तो वह आचार्य की योग साधाना के अभिभूत हो गए। आचार्य ने आजादी के आंदोलन में गांधी की प्रेरणा से चरथावल क्षेत्र में क्रांति की अलख जगाई थी। कस्बे में अरविंद आश्रम निकेतन उनकी यादों की अनमोल पूंजी है।
चरथावल के देव शर्मा को उनके पिता राम प्रसाद त्यागी ने गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार दाखिला दिलाया। उस समय स्वामी श्रद्धानंद गुरुकुल के आचार्य थे। उन्हीं की शिक्षा-दीक्षा में वह वेद मनीषी बने और योग विद्या हासिल की। उनके मन में स्वदेश प्रेम की भावना जागी और वर्ष 1921 में चरथावल लौट आए। संगठन बनाकर गांव-गांव घूमे और स्वाधीनता का जज्बा जगाया। हरिद्वार गुरुकुल के सम्मेलन में महात्मा गांधी ने उनके व्याख्यान सुने तो उन्हें साबरमती आश्रम आमंत्रित किया।
गुजरात के साबरमती आश्रम में दो जनवरी वर्ष 1928 उनकी गांधी से भेंट हुई। लंबी अवधि तक बापू के साथ वहां रहे। गांधी ने अपनी आत्मकथा में उनका जिक्र किया है। गुरुकुल में आचार्य की भेंट शहीद भगत सिंह से हुई। 13 अप्रैल, 1938 को उन्होंने सन्यास की दीक्षा ली और देव शर्मा से आचार्य अभयदेव बन गए। आजादी आंदोलन में लाल बहादुर शास्त्री, गोविंद वल्लभ पंत और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के संपर्क में आए।
दूधली के स्वतंत्रता सेनानी रहे आशा राम शर्मा के पुत्र वेदप्रकाश बताते हैं चरथावल में गांधी की प्रेरणा से 25 आर्य समाज के युवाओं की टॉली सत्याग्रही आंदोलन में कूद पड़े। उन्हें जेल में डाला गया। फिरंगी हुकूमत के जुल्मों की दास्तां पिता की जुबान पर आते ही ग्रामीणों में जोश भर जाता था। गांधी के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में पिता के साथ गांव के युवाओं ने हिस्सा लिया। आशाराम शर्मा अंग्रेजी हुकूमत की आंखों की किरकिरी बना रहा।
बिरजानंद इंटर कॉलेज रामपुर के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य चरथावल निवासी धर्मराज त्यागी बताते है आचार्य अभय देव के आध्यात्मिक विचारों और योग विद्या से महात्मा गांधी अभिभूत थे। दोनों के मधुर संबंध होने की वजह से चरथावल गौशाला को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 2.50 लाख का अनुदान दिलाया था। बापू के संपर्क में आने के बाद स्वतंत्रता संग्राम में वह दो साल सहारनपुर जेल में कैद रहे।