- मुजफ्फरनगर में चारों प्रत्याशी समाजवादी पार्टी से
- बुढ़ाना सीट पर भाकियू नेता धर्मेंद्र मलिक दावेदार
- सदर सीट पर सपा के कोटे से प्रत्याशी की उम्मीद
मदन बालियान
मुजफ्फरनगर। गठबंधन की सियासत में सपा का दांव रालोद पर भारी पड़ता दिख रहा है। भाकियू के गढ़ मुजफ्फरनगर में अब तक घोषित चारों टिकट सपा नेताओं को ही मिले हैं। खतौली और पुरकाजी में सिंबल रालोद का है, लेकिन प्रत्याशी सपा के होंगे। बुढ़ाना विधानसभा सीट पर अराजनैतिक भाकियू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक की दावेदारी से टिकट की घोषणा लटक गई है। सदर सीट पर भी सपा के कोटे से ही प्रत्याशी उतारे जाने की संभावना बनी हुई है।
किसान आंदोलन के बाद बदले माहौल में राजनीतिक दल अपना-अपना समीकरण साध रहे हैं। 2017 में भाजपा की लहर यहीं से चली और पूरे प्रदेश में असर दिखा था। इस बार भी सियासी दलों के लिए मुजफ्फरनगर के समीकरण महत्वपूर्ण हैं। सपा-रालोद गठबंधन की अंदरूनी सियासत में बाजी सपा ने मारी है। अब तक घोषित चारों सीटों पर सपा के ही प्रत्याशी है। खतौली से रालोद ने उम्मीदवार बनाए पूर्व सांसद राजपाल सैनी और पुरकाजी सुरक्षित सीट से उम्मीदवार पूर्व विधायक अनिल कुमार सपा में सक्रिय है। दोनों रालोद के सिंबल पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। चरथावल से पूर्व विधायक पंकज मलिक और मीरापुर से युवा नेता चंदन चौहान सपा के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे। अब तक घोषित टिकटों से जाहिर हो गया है कि सपा ने गठबंधन की राजनीति में भी अपनी चाल चल दी है।
अखिलेश ने धर्मेंद्र को बुलाया तो मची हलचल
फोटो समेत
रालोद के हिस्से वाली बुढ़ाना विधानसभा पर टिकट की दावेदारी रोचक मोड़ पर है। रालोद से पूर्व विधायक राजपाल बालियान अब तक की दौड़ में सबसे आगे हैं। इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाकियू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक को कॉल कर लखनऊ बुलाया। बृहस्पतिवार को दोनों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद बुढ़ाना सीट से टिकट की घोषणा रोक दी गई है। हालांकि कयास यह लगाए जा रहे हैं कि रालोद का ही प्रत्याशी बुढ़ाना से चुनाव मैदान में उतरेगा।
सदर सीट पर गौरव स्वरूप दौड़ में बरकरार
शहर सीट से सपा नेता गौरव स्वरूप टिकट की दौड़ में बरकरार है। रालोद के टिकट पर उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। रालोद से भी टिकट के कई दावेदार हैं, लेकिन बृहस्पतिवार रात तक गौरव स्वरूप के नाम की चर्चा लखनऊ से मुजफ्फरनगर तक सबसे आगे चल रही है।
टिकटों के बंटवारे से बनेगा नया समीकरण
जिले में चुनाव बेहद पेचीदा मोड़ की तरफ बढ़ रहे हैं। रालोद के सिंबल पर सपा के उम्मीद से अधिक प्रत्याशी उतारे जाने के बाद मतदाताओं का रुख क्या रहेगा, यह देखने वाली बात होगी। बसपा और भाजपा भी गठबंधन के टिकटों पर नजर गड़ाए हैं।
रालोद नेताओं को संतुष्ट करना चुनौती
लंबे समय से चुनाव की तैयारियों में जुटे रालोद नेताओं को संतुष्ट करना गठबंधन के लिए चुनौती बनेगा। भले ही सीधे तौर पर नाराजगी देखने को नहीं मिले, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर चौपालों तक टिकट बंटवारे की चर्चा चल रही है।