सोलानी नदी उफान पर, बाढ़ जैसे हालात
पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। पिछले तीन दिनों से लगातार उत्तराखंड से छोड़े जा रहे पानी से सोलानी नदी उफान पर आ गई है। पानी नदी से बाहर निकलकर कई गांवों के रास्तों पर आ जाने से ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ग्रामीण नाव में बैठकर ही नदी पार करने को मजबूर हैं। पानी के लगातार बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।
पिछले माह से उत्तराखंड से बार बार पानी छोड़े जाने से खादर क्षेत्र के लोगों का जनजीवन जहां अस्त-व्यस्त हो गया है। वहीं ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाल यह है कि रात में अगर किसी ग्रामीण को स्वास्थ्य संबंधी कोई दिक्कत होती है तो गांवों में कोई चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। गांवों के रास्तों व जंगलों और खेतों में पानी भर जाने से ग्रामीण खेतों पर नहीं जा पा रहे हैं। सोलानी नदी में पानी अधिक होने पर ग्रामीणों को नाव में बैठकर ही नदी पार करनी पड़ रही है। गत सप्ताह पानी कुछ कम होने पर ग्रामीणों ने राहत महसूस की थी। मगर, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को उत्तराखंड की पहाड़ियों से छोड़े गए पानी से सोलानी नदी पूरे उफान पर आ गई है।
शनिवार को पानी नदी के बाहर निकलकर गांव रामनगर, रजगल्लापुर, भदोला, रतन पुरी, चानचक आदि दर्जनों गांवों के रास्तों पर आ गया, जिससे ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाने पर ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खेतों और जंगलों के हाल यह है कि करीब चार फुट पानी भरा होने ग्रामीण खेतों पर नहीं जा पा रहे हैं। कुछ ग्रामीण ही बमुश्किल खेतों पर पहुंचकर पशुओं के लिए चारा ला पा रहे हैं।
शनिवार को पानी लगातार बढ़ने से गांव रजगल्लापुर, रामनगर, रतनपुरी, शेरपुर नगला, भदौला, भदौली, अलमावाला, जिंदावाला, चमरावाला, सुहेली, चानचक, पांचली, फरखपुर आदि करीब दो दर्जन गांवों के ग्रामीणों में दहशत व्याप्त हो गई। पानी और बढ़ने की संभावना को लेकर ग्रामीणों ने घरों में रखा सामान सुरक्षित स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है।
प्रधान सुनील कुमार बारी, राजेंद्र पांचली, राजू प्रजापति, साधुराम, बिजेंद्र कुमार, कृष्णपाल, यादराम, बिजेंद्र सिंह, महकार सिंह आदि ग्रामीणों ने बताया कि जंगलों व खेतों में पानी भरा रहने से पिछले करीब एक माह से चारे की समस्या बनी हुई है। चारा नहीं होने पर पशुओं को भूसा खिलाना पड़ रहा है। शुक्रवार की रात ज्यादा पानी आ जाने से शनिवार को नदी के पूरे उफान पर आ जाने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। सिंचाई विभाग के एसडीओ नरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि शनिवार को उत्तराखंड से मात्र दो हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। खतरे वाली कोई बात नहीं है।