मुजफ्फरनगर। केशव सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास ने कहा कि गुरू की महत्ता हमारे जीवन में अनुपम है, क्योंकि गुरू के बिना हम जीवन का सार ही नहीं समझ सकते हैं।
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन डॉ सत्यकृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि गुरू चरणों की सेवा का अवसर मिलना परम सौभाग्य होता है, जो अनमोल है। गुरू सेवा को समर्पित भाव से करना और उनके आदेश का पालन सदा ही करना चाहिए। उन्होंने धार्मिक ग्रंथो में वर्णित अवतारों के बारे में बताते हुए कहा कि कहीं पर 24 तो कहीं पर दसावतार की कथा बताई जाती है, लेकिन अवतारों की संख्या की गणना संभव नहीं है, क्योंकि जितने भक्त होते हैं उतने ही अवतार होते हैं। घर द्वार छोड़कर वन में चले जाने से ही वैराग्य नहीं होता, बल्कि अपने अंत:करण की शुद्धता नितांत आवश्यक है। हमारे जीवन में विचारों का आदान प्रदान रोम-रोम से होता है, इसके लिए सिर्फ नाक, कान और आंखें ही नहीं होती हैं। संत महात्मा की दृष्टि को दिव्य बताते हुए कहा कि हम उतना ही देख सकते हैं, जितनी दूर तक हमारी दृष्टि जाती है, लेकिन संत जन अनंत तक देखने की दृष्टि रखते हैं। यजमान विनय मित्तल सपत्नीक रहे। टीना ने भजन सुनाए। संदीप मलिक, सतीश अग्रवाल, संदीप सिंघल, अंकुर गोयल, ओपी चौहान, सुभाष मित्तल, डॉ अमित मित्तल, अरुण गर्ग, नरेश गुप्ता सभासद, डॉ कैलाश अरोरा, सुरेश वार्ष्णेय, शिशुकांत गर्ग, प्रवीण अरोरा, राकेश उपस्थित रहे।