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प्रकाश परिवहन शुल्क के ठेके में हो रही नियमों की अनदेखी

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मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत में प्रकाष्ठ परिवहन कर का ठेका दो माह बीतने के बाद भी नहीं छोड़ा जा सका। जो बोली हुई उसे भी उलझा दिया गया। इस तरह की व्यवस्था बना दी गई कि पुराने ठेकेदार को ही ठेका मिल जाए। प्रशासनिक अफसर भी हस्तक्षेप को तैयार नहीं है। जिला पंचायत को सीधे 34 लाख का नुकसान पहुंचाने की तैयारी चल रही है।
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जिला पंचायत में प्रकाष्ठ परिवहन शुल्क का ठेका दो माह पहले छोड़ा जाना चाहिए था, ठेके की डेट कई बार निरस्त कर दी गई। इसका सीधा लाभ पुराने ठेकेदार को मिल रहा है। पुराना ठेकेदार ही लकड़ी से भरे वाहनों से शुल्क की वसूली कर रहा है। जब बोली हुई तो उसे योजनाबद्ध तरीके से उलझा दिया गया। पुराने ठेकेदार ने 51 लाख की बोली लगाई और दूसरे ठेकेदार से दो करोड़ की बोली लगवा दी गई। बीच में कोई बोली नहीं आई। प्रक्रिया में एक ठेकेदार कमिश्नर और डीएम को लिखकर दे चुका है कि वह 85 लाख में ठेका लेने को तैयार है। जिस प्रकार बोली लगाई गई उसको मौका ही नहीं दिया गया। यदि नियम को देखें तो अब दो करोड़ की बोली लगाने वाले ने यदि निर्धारित अवधि में धनराशि जमा नहीं की तो उसकी पांच लाख की जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी और दूसरे नंबर पर रहने वाले ठेकेदार को 51 लाख में ठेका दे दिया जाएगा। दस दिन पहले जब यह प्रक्रिया हुई तो बोली छोड़ने वाले अफसरों ने दो करोड़ की बोली लगाने वाले को एक तिहाई धनराशि जमा करने के लिए शाम तक का समय दिया। बाद में डीएम और सीडीओ ने इस समय को तीन दिन कर दिया था। तीन दिन का समय बीतने के बाद भी दोबारा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। यदि ठेका 51 लाख में दिया जाता है तो 34 लाख का नुकसान जिला पंचायत को सीधे होगा। क्योंकि 85 लाख का प्रस्ताव अफसरों पर जा चुका है।
इस संबंध में अपर मुख्य अधिकारी नूतन शर्मा का कहना है कि वह अपनी रिपोर्ट जिला पंचायत चेयरमैन को भेज चुकी हैं। अभी तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। ठेके में देरी पर जिला पंचायत को हो रहे नुकसान पर वह कुछ नहीं बोलीं।
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