मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोकदल की न्याय यात्रा में नेताओं ने छह मांगों को लेकर डीएम को राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया। पार्टी कार्यालय से जुलूस के रूप में डीएम ऑफिस पहुंचे रालोद कार्यकर्ता डीएम को ज्ञापन देने पर अड़े रहे। बाद में एडीएम प्रशासन अमित कुमार को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि हाथरस की बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध के बाद अभी परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली है, भाजपा सरकार हाथरस की बेटी के अलावा सभी एससी उत्पीड़न के मामलों में तत्काल आर्थिक सहायता के साथ सरकारी नौकरी दे।
भारत बंद के दौरान एससी समाज के बेगुनाह युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस हों। संविदा पर कार्यरत सभी सफाई कर्मचारियों को तत्काल पक्की सरकारी नौकरी के साथ सामान वेतन के अंतर्गत लाया जाए। कानून के बावजूद उत्तर प्रदेश में आज भी सफाई कर्मियों को सीवर में उतरकर सफाई करनी पड़ती है। सरकार तत्काल इस अमानवीय कार्य को संरक्षण देना बंद करें और आधुनिक मशीनों के माध्यम से इस काम को अंजाम देना शुरू करें। सरकारी योजनाओं के लाभ से दलितों को वंचित रखा जाता है, इसलिए ऐसे अधिकारियों तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। कोरोना में सरकार की विफलता की वजह से जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता की जाए।
ज्ञापन देने वालों में अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशांत कन्नौजिया, पूर्व सांसद मुंशीराम पाल, पूर्व विधायक भगवती प्रसाद सूर्यवंशी, यात्रा प्रभारी कमल गौतम, रमेश काकड़ा, डा. मोनिका सिंह, राजू बाल्मीकि, माधोराम शास्त्री, मोहन बेदी, क्षेत्रीय अध्य्क्ष यशबीर सिंह, जिलाध्यक्ष प्रभात तोमर, प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक चौधरी गुर्जर, रमा नागर, कृष्णपाल राठी, विदित मलिक मौजूद रहे।