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बारिश ने तोड़ा आठ साल का रिकॉर्ड, धान की फसल को 10 फीसदी नुकसान

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मुजफ्फरनगर के दिनभर हुई बारिश में छाता लेकर गंतव्य को जाती महिलाएं। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। दो दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश ने पिछले आठ साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अक्तूबर 2013 में 63 मिमी बरसात हुई थी, जबकि इस साल अब तक 68.8 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। अक्तूबर माह में पिछले दस साल की बारिश का रिकॉर्ड देखें तो चार साल ऐसे रहे, जब बरसात नहीं हुई। वर्ष 2015, 2016, 2017 और 2020 में बादल नहीं बरसे। यही नहीं 2012 और 2019 में हल्की बारिश हुई थी। लेकिन इस बार रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है। रविवार को 29.2 मिमी बरसात हुई थी, जबकि सोमवार शाम तक 41.4 मिमी बारिश हुई। इससे पहले एक अक्तूबर को 4.2 मिमी बरसात हुई थी।
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अक्तूबर में किस साल कितनी बारिश
साल बारिश
2012 0.4
2013 63
2014 23
2015 ---
2016 ---
2017 ---
2018 32.2
2019 0.6
2020 ---
2021 74.8 (अब तक)
धान के किसानों को झटका
बारिश से धान के किसानों नुकसान उठाना पड़ेगा। जिला कृषि अधिकारी जसवीर तेवतिया ने बताया कि जिले में धान का रकबा 10 हजार हेक्टेयर है। अब तक करीब 30 फीसदी फसल की कटाई हुई, जबकि 70 फीसदी फसल खेतों में खड़ी है। बारिश के कारण धान की फसल में 5 से 10 फीसदी नुकसान का अनुमान है।
पिछड़ जाएगी सरसों की बुआई
चारे की फसलों से खाली हुए खेतों में सरसों की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों को अभी इंतजार करना पड़ेगा। बारिश के कारण सरसों की बुआई पिछड़ेगी। उधर, फूल वाली सब्जी की फसलों को भी नुकसान होगा। बारिश से फूल झड़ जाएंगे।
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रिकवरी प्रभावित, पिछड़ सकती है पेराई
अक्तूबर माह में लगातार हो रही बारिश के कारण नया पेराई सत्र पिछड़ सकता है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी का कहना है कि सितंबर और अक्तूबर माह की बारिश के कारण रिकवरी प्रभावित होती है।
बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त
बारिश के कारण जन जीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त रहा। रविवार से रुक-रुककर बरसात चल रही है। सड़कों पर वाहनों का आवागमन प्रभावित हुआ। बाजारों में ग्राहकों की संख्या कम रही। शहर के कई क्षेत्रों में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण जलभराव हो गया।
जलजनित बीमारियों का भी खतरा
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ अलका सिंह का कहना है कि बारिश से जल जनित बीमारियों का खतरा बनता है। पानी को एकत्र न होने दें। अपने आसपास के क्षेत्र में सफाई रखें।
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