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Muzaffarnagar News: फोटोकॉपी से सुनवाई पर आपत्ति, हाईकोर्ट गए आरोपी

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मुजफ्फरनगर। चर्चित रामपुर तिराहा कांड में तत्कालीन एसओ सिविल लाइन राधा मोहन द्विवेदी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर फोटोकॉपी पर सुनवाई पर आपत्ति जताई। बचाव पक्ष का कहना है कि वारदात के इतने समय बाद आरोपियों की पहचान नहीं कराई जानी चाहिए।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्रवण कुमार एडवोकेट ने बताया कि रामपुर तिराहा कांड के मूल दस्तावेज गुम होने की स्थिति में फोटोकॉपी पर सुनवाई चल रही है। तत्कालीन एसओ राधा मोहन द्विवेदी ने फोटोकॉपी पर सुनवाई और इतने लंबे समय बाद आरोपियों की पहचान कराए जाने के विरोध में याचिका दाखिल की है। याचिका पर 28 जून को सुनवाई होगी।
यह था मामला

एक अक्तूबर, 1994 की रात अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। इनमें महिला आंदोलनकारी भी शामिल थीं। पुलिसकर्मियों ने रात करीब एक बजे रामपुर तिराहा पर बस रुकवा ली। आरोप है कि महिला आंदोलनकारियों के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म किया गया। उत्तराखंड संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, जिसकी सुनवाई चल रही है।
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अब इन मामलों में चल रही सुनवाई

रामपुर तिराहा कांड में सेशन कोर्ट में सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली में सुनवाई चल रही है जबकि सीबीआई बनाम बृज किशोर और सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली का मजिस्ट्रेट ट्रायल चल रहा है।
बचाव पक्ष ने दिया स्थगन प्रार्थना पत्र
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में पीड़ितों से हथियारों की फर्जी बरामदगी के मामले में बचाव पक्ष की ओर से स्थगन प्रार्थनापत्र दिया गया। अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम/ विशेष न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए चार जून तय की है। उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि सीबीआई बनाम बृज किशोर और एसपी मिश्रा की पत्रावली में बचाव पक्ष ने स्थगन प्रार्थना पत्र दिया है। अब चार जून को सुनवाई होगी। ब्यूरो
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