54 के खिलाफ नामजद रिपोर्ट, 30 को एसआईटी ने माना था बेकसूर
मुजफ्फरनगर। जानसठ क्षेत्र के गांव कवाल में हुए सचिन-गौरव व शाहनवाज हत्याकांड के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा थमने के बाद गांव कुटबा निवासी सराजूद्दीन ने कुल 54 लोगों के खिलाफ घर में घुसकर लूटपाट व आगजनी के आरोप में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एसआईसी ने सराजूद्दीन द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे की जांच करते हुए इसमें नामजद किए गए 30 लोगों को बेकसूर बताते हुए फर्जी नामजदगी के आधार पर उनके नाम मुकदमे से निकाल दिया था। इसके बाद कुल 24 आरोपियों के खिलाफ एसआईसी ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
शाहपुर क्षेत्र का गांव कुटबा भी दंगे से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र में शामिल था। पीड़ित पक्ष दंगे के दौरान गांव से पलायन कर गया था, जो अब दंगा प्रभावितों की बस्ती में रहता है। दंगे के बाद शासन ने इनकी जांच के लिए एसआईसी का गठन किया। जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुकदमे के वादी सराजूद्दीन के साथ ही इसमें बतौर गवाह बनाए गए सभी लोग भी पक्षद्रोही होकर बयानों से पलट गए। इसके चलते न्यायालय ने भी सोमवार को सभी 24 नामजद आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
इनके खिलाफ दाखिल की गई थी चार्जशीट
मुजफ्फरनगर। गांव कुटबा निवासी सराजूद्दीन ने अपने घर में लूटपाट व आगजनी के मामले में 54 लोगों को नामजद किया था। इनमें से एसआईसी ने जांच के बाद केवल 24 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। इनमें पुष्पेंद्र उर्फ काला, सचिन, मम्मल, पवन, नीटू, विनीत उर्फ काला, विश्वजीत, रविंद्र, कुलदीप, राजपाल, निखिल, चंद्रकांत उर्फ काला, पुष्पेंद्र, सोनू उर्फ गौरव, गौरव उर्फ गोविंदा, दीपक, ओमपाल और प्रदीप आदि शामिल थे। इन सभी लोगों को सोमवार को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।