भाकियू अध्यक्ष ने कहा कि गांव के झगड़ों से संगठन को नुकसान हो रहा है। भाव का जिक्र करते हुए कहा कि भाव कम ज्यादा झेल लेंगे, पर संगठन जरूरी है। सरकारों की किसानों की जमीन पर खतरनाक निगाह हैं। सरकार किसानों का खेती के प्रति मोह भंग करना चाह रही है। किसानों के सामने संगठन और स्वाभिमान बचाने की चुनौतियां हैं।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली किसान आंदोलन वैचारिक क्रांति थी। यह सरकार वो सरकार नहीं है, जिन्हें वोट दी थी उन्होंने कब्जा कर लिया है। पूरे विश्व में पूंजीवाद हावी हो गया है।
कोई भी सरकार आए, सरकार का विरोध नहीं है। सरकार की गलत नीतियों का विरोध है। दूध का उत्पादन भूमिहीन किसान कर रहे हैं, दूध की कीमत 20 रुपये कम कर दी गई। किसानों को जैविक खेती करनी होगी। किसान भवन पर 17 मई को होने वाली मासिक पंचायत नहीं होगी। 15 से 18 जून तक चिंतन शिविर हरिद्वार में आयोजित होगा।
जमीन बेचने के हकदार नहीं, सिर्फ रखवाले : टिकैत
भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि युवा पीढ़ी कुछ सुनवाई नहीं कर रही है। ना खेती की तरफ ध्यान दे रही है और ना ही रोजगार की तरफ। आए दिन सड़क हादसों में युवाओं की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कितने ही घरों में सड़क हादसों के कारण ताले बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बाप, दादा जमीन बेच देते तो, तुम्हें कहां से मिलती। तुम जमीन बेचने के हकदार नहीं हो, केवल जमीन के रखवाले हो। गांव में भी रोजगार के अवसर हैं केवल करने वाला चाहिए।
ये रहे मौजूद
खाप चौधरी वीरेंद्र सिंह, कलिंदर मालिक, नवीन राठी, थंबेदार चौधरी श्याम सिंह, पुरकाजी नगर पंचायत अध्यक्ष जहिर फारुकी, सहारनपुर जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह, नरेंद्र पवार, चौधरी सौदान सिंह, रविंद्र मलिक, राज सिंह पवार, कविता चौधरी, जगतार सिंह बाजवा, जसविंदर सिंह ज्ञानी, गुरमेल बाजवा, विनोद खेड़ा, धर्मवीर बालियान, विदेश मलिक, धीरज लाटीयान, कपिल खतियान, अमित दहिया आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता आचार्य रामनिवास जोधपुर और संचालन ओमपाल मलिक ने किया।
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