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श्रद्धा व आस्था का केंद्र कपूरगढ़ का नामदेव मंदिर

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भौराकलां में कपूरगढ़ का नामदेव मंदिर। - फोटो : KHATAULI
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भौराकलां। कोविड-19 महामारी में श्री जन्माष्टमी के अवसर पर नंदलाला के अनन्य भक्त नामदेव मंदिर पर झांकियां नहीं लगी। हालांकि मंदिर में भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।
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भौराकलां-शाहपुर मार्ग पर कपूरगढ़ स्थित हिंडन नदी के किनारे कृष्ण कन्हैया के परम भक्त नामदेव का सिद्धपीठ प्राचीन मंदिर श्रद्धा व आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि प्राचीन काल में मंदिर स्थल पर भक्त नामदेव ने कई वर्षों तक भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान किया। कपूरगढ़ के मंदिर में हर साल चैत्र मास की अष्टमी एवं नवमी तिथि को विशाल मेला लगता है। मेले में दूरदराज जनपदों के श्रद्धालु आकर संत नामदेव और राधा-कृष्ण की दिव्य प्रतिमा के दर्शन कर पुण्यलाभ कमाते हैं। बताया जाता है संत नामदेव का जन्म हैदराबाद में हुआ था। माता-पिता निरंतर भगवान कृष्ण का गुणगान किया करते थे। उनकी अनन्य भक्ति देख बालक नामदेव सम्मोहित हो गया। घर में कृष्णमय माहौल से नामदेव भगवान की भक्ति में ऐसा रमा कि, उन्हीं का हो गया। कथा प्रचलित है बाल्यकाल में नामदेव ने सरल हृदय से भगवान का दूध से भोग लगाया। भोग लगाने के बाद नेत्र खोलकर देखा, तो दूध कटोरे में ज्यों का त्यों मौजूद है। भगवान कृष्ण द्वारा दूध ग्रहण नहीं करने पर तो नामदेव जोर-जोर से रोने चिल्लाने लगा। अटूट भक्ति में लीन बालक की हठ के आगे भगवान प्रकट हुए और दूध ग्रहण कर नामदेव को अपना विशेष कृपा पात्र बनाया।
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