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जिला जेल में एक और बंदी की मौत

Mon, 16 May 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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जेल - फोटो : jail
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जिला कारागार में बंदियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रही मौतों से जेल प्रशासन और बंदियों के बीच दहशत व्याप्त हो गई हैं। देर रात कारागार में बुजुर्ग बंदी को तबियत खराब होने के चलते जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
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मृतक के दो पुत्र भी कारागार में बंद है। गांव से आए परिजनों की मौजूदगी में शव का पंचनामा भरवाकर उसे पीएम के लिए भिजवाया गया। बताते चलें कि पिछले पांच माह में यह छठी मौत है। 

जेल में पिछले पांच माह के भीतर छह बंदियों की मौत हो चुकी है। भोपा थाने के शुक्रताल निवासी ब्रह्मसिंह (66) पुत्र धर्मपाल पांच दिन से जेल अस्पताल में भर्ती था। शनिवार को तबियत को आराम मिलने पर उसे बैरक नंबर-11 में भेज दिया गया। रात करीब 12.15 पर उसकी तबियत खराब हो गई। रात में जेल अधीक्षक ने उसे कारागार में तैनात चिकित्सक को दिखाया तो उसने बंदी को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
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बंदी को सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और घबराहट हो रही थी। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी करीब ढाई बजे मौत हो गई। जेल प्रशासन ने सुबह अधिकारियों, आईजी जेल और मृतक के परिजनों को मामले की जानकारी दी। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने बताया कि 12 अप्रैल 2016 को बंदी ब्रह्म सिंह 302 के मामले में अपने दो बेटों अनिल और दीपक के साथ जेल में आया था।

तीनों को कारागार की बैरक नंबर-11 में रखा गया था। बुजुर्ग होने के चलते अक्सर उसकी तबियत खराब रहती थी। देर रात भी उसकी तबियत खराब होने पर उसे अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। 

पुत्र को दाह-संस्कार कराने की अनुमति
ब्रह्मसिंह के साथ उसके दो बेटे अनिल और दीपक भी उसके साथ ही जेल में बंद थे। सूचना मिलने पर रविवार सुबह परिवार के बाकी लोग भी कारागार पहुंच गए। उसके अंतिम संस्कार के लिए किसी और के नहीं होने से जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने डिप्टी जेलर नागेश सिंह को कोर्ट में एक पुत्र की पैरोल कराने के लिए भेजा।

एडीजे-द्वितीय की यहां हुई सुनवाई में जज ने बड़े पुत्र अनिल उर्फ पप्पू को शाम चार बजे से दाह-संस्कार होने के समय तक का पैरोल दे दिया है। 
जिला जेल में हुई ब्रह्मसिंह की मौत के मामले में उसके परिजनों ने उसका प्राइवेट उपचार कराने की गुहार लगाई थी। कई बार कहने के बाद भी कारागार के चिकित्सक ने जेल में ही उसका उपचार चालू रखा। 

ढाई हजार बंदियों की जिंदगी एक के हवाले
कारागार में बंद बंदियों को जहां एक और लचर चिकित्सा व्यवसथा से जूझना पड़ता है, वहीं दूसरी और मात्र एक चिकित्सक के जिम्मे करीब ढाई हजार बंदियों के उपचार की व्यवस्था है। ऐसे में एक गांव जैसी आबादी लिए बैठी कारागार में कैसे सही उपचार की उम्मीद की जा सकती है।

कारागार में करीब ढाई हजार बंदी हर वक्त मौजूद रहते हैं, जितने रोजाना निकलते हैं, उतने ही आ जाते हैं। जेल के भीतर करीब 30 बेड का अस्पताल है, जो हर समय फुल रहता है। चिकित्सा सुविधा के नाम पर एक चिकित्सक और एक फार्मेसिस्ट के जिम्मे सभी बंदियों के उपचार की व्यवस्था है। 
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