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अंधेरगर्दी, अवैध पंप लगते गए और किसी को खबर नहीं लगी

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मुजफ्फरनगर: पुरकाजी में लक्सर रोड पर अवैध पंप पर मशीन लगी थी। जिन्हें रात में उखाड लिया गया। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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अंधेरगर्दी, अवैध पंप लगते गए और किसी को खबर नहीं लगी
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मुजफ्फरनगर। बायोडीजल पंप पर हुए अग्निकांड में दो लोगों की मौत के मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अंधेरगर्दी का हाल यह है कि हाल यह है कि एक पेट्रोल पंप का लाइसेंस लेने के लिए जहां कई विभागों की अनुमति और लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता है, बायोडीजल पंप लगते गए और कौन इन्हें लगवा रहा है, कौन सा विभाग इन्हें अनुमति दे रहा, इसका किसी को कुछ पता नहीं। कभी न तो इनके सैंपल लिए गए और ज्वलनशील पदार्थ होने के बावजूद वहां पर अग्निशमन के पर्याप्त उपाय है या नहीं, इसकी जांच नहीं हुई। कोई भी विभाग इस मामले में जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
बड़ा सवाल यह भी है कि इनके पास बायोडीजल कहां से आ रहा था, वह प्रमाणित था या मिलावटी किसी को कुछ पता नहीं। सूत्र जरूर कहते हैं कि इसकी आड़ में मिलावटी डीजल बेचा जा रहा था।कहीं-कहीं तो ड्रम में रखकर पेट्रोल भी बेचा जा रहा था। अमर उजाला ने पड़ताल कराई तो मुजफ्फरनगर ही नहीं सहारनपुर में भी बायोडीजल के नाम पर पेट्रोल पंप चलते मिले। गांव रुड़कली में अवैध पंप पर लगी आग में दो लोगों की मौत के मामले में प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति तो गठित कर दी गई है, लेकिन तीन दिन बाद भी न तो किसी तरह की जांच शुरू हो सकी है और न ही अवैध पंप संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई ही की गई है। पुलिस ने हादसे के रूप में जीडी में तस्करा डाल अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। आपूर्ति विभाग नियम और गाइड लाइन जारी नहीं होने का हवाला देते हुए मामले में शांत बैठा है। अब तक पंप संचालक के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई न होना प्रशासनिक मशीनरी में तेल माफिया के हस्तक्षेप का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
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इन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मिलता है पेट्रोल पंप का लाइसेंस
पेट्रोल या डीजल पंप के लिए पेट्रोलियम कंपनी की ओर से डीलर को लेटर ऑफ इंडेंट मिलता है। इसके बाद डीलर की ओर से जिला प्रशासन को लाइसेंस के लिए आवेदन दिया जाता है। जिस जमीन पर पंप खोलना होता है, उसकी एनओसी एडीएम देते हैं। इनके अलावा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, बिजली कंपनी, फायर ब्रिगेड,नगरीय निकाय या ग्राम पंचायत, स्टेट हाईवे या नेशनल हाईवे की एनओसी ली जाती है। यह एनओसी मिलने के बाद कंपनी और डीलर के बीच एग्रीमेंट होता है। इसके बाद कलेक्टर की ओर से डीलर को पेट्रोल-डीजल की खरीद, बिक्री और संग्रहण का लाइसेंस जारी किया जाता है।
बायोडीजल के नाम पर क्या नीति, किसी को पता नहीं
बताया जा रहा है कि बायो डीजल को एथनॉल की तरह डीजल में मिलाकर ही बेचने की व्यवस्था है। यह काम भी केवल पेट्रोलियम कंपनियां ही करती हैं, जैसे एथनॉल को सीधे बेचने की व्यवस्था नहीं है। 2019 में बिना मिलावट किए डीजल बेचने की अनुमति दी थी, लेकिन इसकी बिक्री का अधिकार राज्यों के खाद्य एवं रसद विभाग को सौंपा गया था। तब शासन स्तर पर हुई एक बैठक में बायोडीजल बिक्री का लाइसेंस देने, सैंपल लेने, जांच करने व दंडित करने जैसे कार्यों के लिए अधिसूचना जारी करने पर सहमति बनी थी। निगरानी के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में गठित जैव ऊर्जा समिति को पुनर्गठित किया जाना था। इस समिति में सीडीओ, डीएफओ, इंडियन आयल व नाबार्ड के अधिकारियों के अलावा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के प्रतिनिधि व अग्रणी किसान प्रतिनिधियों को शामिल होना था। अधिसूचना जारी हुई या नहीं किसी को पता नहीं। जारी नहीं हुई तो कैसे ये पंप लगते गए।
शासन से जारी नहीं हुआ कोई शासनादेश:डीएसओ
डीएसओ जाकिर हुसैन का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा अप्रैल 2019 में बायोडीजल पंपों के आवंटन व जांच का अधिकार खाद्य एवं रसद विभाग को दिया था, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से अब तक इसे लेकर कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है। इसके चलते बायोडीजल पंपों को अनुमति देने या उनकी जांच करने के अधिकार विभाग के पास नहीं हैं।
आज से शुरू होगी जांच:एडीएम
-एडीएम वित्त एवं राजस्व आलोक कुमार का कहना है कि एसडीएम जानसठ को त्वरित जांच के निर्देेश दिए गए हैं। शनिवार से जांच शुरू कर दी जाएगी और जल्द ही इन अवैध पंपों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस मुकदमा दर्ज कर सकती है
- पूर्व एडीजीसी जितेंद्र कुमार त्यागी का कहना है कि अवैध पेट्रोल पंप पर आग लगने का हादसा हुआ है। दो लोगों की मौत हुई है। यदि पीड़ित पक्ष कोई मुकदमा दर्ज नहीं करा रहा है तो हादसे को देखते हुए पुलिस को अपनी ओर से मुकदमा दर्ज कराने का अधिकार है।
कार्रवाई के डर से पंप बंद कर फरार हुए संचालक
ककरौली, पुरकाजी व छपार क्षेत्र में भी शुक्रवार को बंद हुए अवैध बायोडीजल पंप
मुजफ्फरनगर। गांव रुड़कली में अवैध बायोडीजल पंप पर हुए हादसे के बाद कार्रवाई के डर से जिले के दूसरे हिस्सों में बायोडीजल पंप बंद कर संचालक फरार हो गए। पुरकाजी व छपार क्षेत्र में बृहस्पतिवार जो अवैध पंप चल रहे थे, उनकी भी मशीनें रात में खोल ली गईं, कुछ पर ताले लटके मिले है।
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मंगलवार के हादसे के बाद कुछ पंप तो बुधवार रात ही बंद हो गए थे। गांव खुजेड़ा, जटवाड़ा व ककरौली में बृहस्पतिवार को भी बायोडीजल पंप चल रहे थे, जिन्हें बृहस्पतिवार देर रात बंद कर दिया गया। पुरकाजी के सुआहेड़ी में गौरव बायोडीजल पंप पर बृहस्पतिवार को डीजल की बिक्री हो रही थी। बृहस्पतिवार देर रात इस पंप की भी मशीन उखाड़ ली गई। शुक्रवार सुबह इस पंप पर ताले लटके मिले। छपार के गांव खामपुर, छपार, तेजलहेड़ा चौराहा, खिंदडिया व खुड्डा में अवैध बायोडीजल पंप की मशीनों को कपड़े से ढककर ऑफिसों पर ताले लगा दिए गए हैं।
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