...जो तेरे मेरे मसले हैं हम ही सुलझा लें तो बेहतर है
देवबंद। आस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध कवयित्री सोमा नायर के सम्मान में बज्म-ए-अदब द्वारा जश्न-ए-सोमा नायर (मुशायरा उर्दू की एक शाम) आयोजित किया गया। जिसमें शायरों ने अपने कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सहारनपुर-मुजफ्फरनगर हाईवे स्थित बैंक्वेट हाल में कार्यक्रम का उद्घाटन एमएलसी प्रत्याशी ऊषा चंद्रा ने किया। कवयित्री सोमा नायर ने कहा जो तेरे मेरे मसले हैं हम ही सुलझा ले तो बेहतर है, किसी का बीच में आना मुझे अच्छा नहीं लगता। हास्य एवं व्यंग्य कवि डा. शमीम देवबंदी ने पढ़ा उसका अहसान अब नहीं लेना, वो तो कम जर्फ है जताता है। नाजिम अशरफ किरतपुरी ने पढ़ा मैंने इस वास्ते जुगनू से मोहब्बत की है, वो अंधेरों में मेरे काम तो आ जाता है। चांद देवबंदी ने कहा भले ही बेवफाई की है मेरे साथ में उसने, मगर कुर्बानियां भी दी ताल्लुकात में उसने। रियाज प्रतापगढ़ी ने पढ़ा ब्याज में खेत, न जेवर न वो धन चाहता है, सूदखोर आज भी बेवा का बदन चाहता है। डॉ. विजारत नबी ने कहा हम अपना गम जमाने से छुपाते तो बेहतर था, खामोशी से मोहब्बत का मजा लेते तो बेहतर था। डॉ. सादिक देवबंदी ने पढ़ा पंछी की हर उड़ान भी कुदरत खुदा की है, देखों तो आसमान भी कुदरत खुदा की है। नदीम अनवर ने कहा तेरी यादों के दरिया अश्क बनकर, मेरी आंखों से हिजरत कर रहे हैं। इनके अलावा नूर हसन नूर, राशिद कमाल, नफीस अहमद, अनवर मुजतर आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए। संस्था की ओर से कवियो, शायर व अतिथियों को सम्मानित किया गया। अध्यक्षता डा. एस.ए. अजीज व संचालन डा. शमीम देवबंदी ने किया। इस मौके पर शशीधरन नायर, आशुतोष अग्रवाल, प्रेम कुमार मेहता, अय्यूब बेग, सलीम ख्वाजा, माहिर हसन, शहजाद उस्मानी, अनवार हसीन, नितिन गुप्ता, सलीम कुरैशी, मंसूर अनवर खां, इकराम अंसारी, आलिम खान, शुऐब कुरैशी, नबील मसूदी, मुनीब अंसारी, रमीज अंसारी आदि मौजूद रहे।