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महंगाई ने घटाया रावण का कद

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चरथावल में कारीगर के घर बना रावण का पुतला - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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महंगाई ने घटाया रावण का कद
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मुजफ्फनगर/चरथावल। दो साल से कोरोना और उसके बाद महंगाई, इसके चलते रावण के पुतलों की मांग कम हुई है साथ ही उनका आकार भी घट गया है। पहले 100 फीट के पुतले बनते थे, इस बार सिर्फ 30 फीट तक के पुतले बना रहे है। मायूस कारीगर कहते है तीसरी लहर के कारण दूसरे प्रांतों से आर्डर नहीं मिलने से हुनरमंद कारीगर मायूस है। अधिकांश पुतले मुस्लिम कारीगर बनाते हैं।
बाहरी राज्यों से नहीं आई मांग
चरथावल के तीरग्रान में करीब 60 साल से पहले इस्माइल, उनके पुत्र शब्बीर ने रामलीला मैदान में पुतले बनाने शुरू किए थे। उनके बाद शब्बीर पुत्रों एवं पौत्रों सहित 32 सदस्य इस कार्य को कर रहे हैं। पुश्तैनी काम में जुटे शराफत खुर्शीद भारती बताते है, बुराइयों पर अच्छाई के प्रतीक दशहरा पर्व से उनकी आजीविका चली आ रही है। कोरोना से लाखों रुपये का कारोबार प्रभावित है। 100 फीट तक पुतले बनाए जाते थे। कोरोना काल में कम समय मिलने इस बार सिर्फ 30-40 फीट के पुतलों का आर्डर कुटेसरा, चरथावल, गांधी कालोनी से मिल पाया है। दो सालों से पंजाब के लुधियाना, पटियाला, सहारनपुर गांधी पार्क, नानौता, रामपुर, रुड़की, चडीगढ़ एवं शहर के मैदानों में चरथावल के पुतले नहीं जल रहे हैं, जिससे उन्हें कई लाख का नुकसान है।
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नई मंडी घरों में छोटे पुतले जलने की परंपरा निराली
चरथावल के हुनरमंद नसीम भारती ने बताया शहर की नई मंडी में घर-घर रावण के छोटे पुतले जलने की परंपरा अरसे से है। उन्होंने करीब 70 पुतले बनाकर दुकानदार को आपूर्ति किए। करीब 600-700 रुपये का एक पुतला बिकता है। रियासत भारती ने बताया वर्ष 1990 से वह रावण के पुतलों के अलावा सावन माह में फैंसी कांवड़ बनाते है। यह कार्य भी दो साल से बंद है। पुतलों की डिमांड के अनुसार जन्माष्टमी पर बांस एवं कच्चे सामान जुटा लेते थे। यूपी के सीएम ने इस बार रामलीला की घोषणा देर से की। जिससे 10 प्रतिशत आयोजन हो पाए है। उनके परिवार के सदस्य वर्ष 1986 से 1990 तक मुंबई में नार्थ जॉन कल्चरल क्लब भारत सरकार के आयोजित कार्यक्रमों में कला का जलवा बिखेर चुका है। अपना उत्सव कार्यक्रम में बांस काटकर खिलौने बनाने के कौशल से इनाम बटोरें हैं।
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बुजुर्गों की विरासत संभाल रहे अली मियां
शहर से सटे वहलना गांव के अली मियां कहते है, दादा बुंदू के बाद पिता फिरोज द्वारा पुतले बनाने की दक्षता उन्हें हासिल हुई थी। वह बुजुर्गों की विरासत को संभाल रहे हैं। हालांकि कोविड़ ने काम प्रभावित कर दिया है। उनकी चौथी पीढ़ी में उनके दो पुत्र तोसीफ और मासूम अब रावण के पुतले बना रहे है। तीन अन्य बेटे दूसरे कार्य में जुट गए है। इस बार सिर्फ 30-35 फीट तक के रावण-कुंभकर्ण के दो-दो पुतलों का आर्डर रोहाना, पटेलनगर, रामपुर की रामलीलाओं से छह पुतलों का आर्डर है। दो साल पहले 20 से 22 पुतले पहले से बुक रहते थे।

रावण के पुतले तैयार करते अली मियां- फोटो : MUZAFFARNAGAR

वहलना में पुतले तैयार करते कारीगर- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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