भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद जी ने कहा कि ईश्वर के साक्षात्कार में सबसे बड़ी बाधा अंतःकरण की अशुद्धि है। उपासना प्रभु अनुभूति की प्रथम सीढ़ी हैं। दुखों से निवृत्ति एवं मोक्ष प्राप्ति का भक्ति के अतिरिक्त अन्य कोई सरल साधन नहीं हैं। भक्ति से ही परमात्मा को जाना पहचाना और प्राप्त किया जा सकता हैं।
तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के डोंगरे भागवत भवन में श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन शुरू कराया गया। सिद्ध वेंकटेश देवधाम जलगांव महाराष्ट्र निवासी मणियार परिवार की ओर से आयोजित कथा का शुभारंभ भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद जी ने किया।
श्री धाम वृंदावन से पधारे कथाव्यास स्वामी श्रवणना नंद सरस्वती ने कहा कि सन्त-महापुरुषों का सानिध्य, सत्संग और सेवा पुण्य कर्मों से ही प्राप्त होता है। महापुरुषों का जीवन चरित्र हमारे जीवन निर्माण में अहम भूमिका निभाता हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र और अलग-अलग राज्यों के रहने वाले श्रद्धालु कथा मेें उपस्थित रहे।