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विश्व में जल संकट से जूझ रही बहुत बड़ी आबादी : पूनम

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देवबंद। सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन दिशा की ओर से मंगलवार को विश्व जल दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें महिलाओं ने जल व वनों के साथ ही प्रकृति के संरक्षण पर बल दिया।
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शिक्षक नगर में कार्यक्रम में पूनम कौशिक ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है। परंतु वर्तमान में विश्व की बहुत बड़ी आबादी जल संकट से जूझ रही है। स्वच्छ पानी की कमी के कारण प्रतिवर्ष बहुत सारे लोग अपना जीवन खो देते हैं। इसका मुख्य कारण पृथ्वी पर मानव जीवन की जरूरतों को पूरा करने के सबसे बड़े स्रोत नदी, नालों, पोखरों व झीलों का प्रदूषित होना। शुभलेश शर्मा ने कहा कि आज मानव परंपरागत जल स्रोतों के साथ सौतेला और स्वार्थ भरा बर्ताव कर रहा है। पुराने तालाबों, कुओं, झीलों और कुंडों को नष्ट किया जा रहा है, जबकि ये भूगर्भीय जल पृथ्वी पर मानव जीवन की जरूरतों का सबसे बड़ा सहारा है। नेहा सिंघल व स्नेहलता त्यागी ने कहा कि जब बरसात नहीं होती है तो भूगर्भीय जल ही मानव की जरूरतों को पूरा करता है, लेकिन आधुनिक जीवन शैली ने हमें जल संसाधनों के संरक्षण के प्रति उदासीन बना दिया है। रीतू सिंह व रेखा धीमान ने कहा कि जल व वन मानव जीवन के लिए बहुत जरूरी हैं। भूगर्भीय जल के अत्यंत दोहन ने प्रदेश के बहुत सारे हिस्सों में पहले ही उपलब्ध जल भंडारण की स्थिति को भयावह कर दिया है। इसलिए हमें जल के उपलब्ध भंडारण के साथ-साथ बरसाती जल के संरक्षण और संग्रहण के प्रति सजग रहना होगा। संगोष्ठी में सुधा सैनी, विनिता त्यागी व सोनिया आदि ने भी विचार रखे।
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