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औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी से मैली हो गई हिंडन

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बुढ़ाना व देहात से गुजरती हिंड़न नदी का दृश्य। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। उत्तरी भारत में यमुना नदी की सहायक हिंडन नदी पुराने जमाने में हरनंद या हरनंदी के जानी जाती थी। विभिन्न बीमारियों को दूर करने के लिए लोग इसमें स्नान करते थे। नदी किनारे बने मंदिरों में आयोजित भंडारे में हिंडन का शुद्ध जल प्रयोग किया जाता था। मगर औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी से आज हिंडन मैली हो गई है।
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कस्बा और देहात क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच दशक में निर्मल हिंडन औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी के कारण मैली हो गई है। नदी किनारे बसे गांव सावटू, हड़ौली, सदरूद्दीननगर, शिकारपुर, कपूरगढ़, खानपुर, बवाना, सफीपुर, बुढ़ाना गांवों का ऊपरी सतह का नल का पानी पीने लायक नहीं रहा। इस पानी के प्रयोग से कैंसर होने का खतरा बढ़ गया है।
हिंडन नदी का दूषित पानी मवेशियों के साथ-साथ जलीय जंतु व प्राणियों के लिए भी खतरा बन गया हैं। यह नदी अपने निर्धारित रकबे को छोड़कर किसानों की जमीन में बहती है। नदी किनारे बसे गांव कपूरगढ़ व कस्बा बुढ़ाना में मंदिर स्थापित हैं। दोनों स्थानों पर मंदिरों के समीप नदी किनारे वर्ष में दो बार मेले लगते थे। ज्येष्ठ में गंगा स्नान पर तथा बैशाख के शुक्लपक्ष की अक्षया तृतीया पर मेले का आयोजन होता था। श्रद्धालुओं की दीप जलाकर व प्रसाद चढ़ाकर पूजा अर्चना करने की परंपरा निराली थी। खेत में काम करने वाले किसान व मजदूर गर्मी में नदी में रेत हटाकर नीचे से निकलने वाला निर्मल व ठंडा जल पीकर प्यास बुझाते थे। आज नदी किनारे बसे गांव के ग्रामीण हैंडपंप का पानी पीने से भी डरते हैं।
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भंडारे में घी खत्म होने पर प्रयोग किया था निर्मल जल
गांव कपूरगढ़ निवासी पूर्व प्रधान हरि प्रकाश का कहना है कि नदी किनारे आनंद कुटि मंदिर है। मंदिर में तपस्या करने वाले आनंद बोध महात्मा ने अपने समय में भंडार किया था। भंडारे में घी खत्म हो गया था, तो महात्मा जी के कहने पर श्रद्धालु एक कनस्तर पानी नदी से भरकर लाए तथा घी की जगह प्रयोग किया। भंडारा खत्म होने के बाद एक कनस्तर घी नदी में प्रवाहित किया गया। यह नदी की शुद्धता तथा निर्मल होने का प्रतीक माना जाता है।
स्नान करने से ठीक होते थे शारीरिक रोग
नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र त्यागी का कहना है कि नदी किनारे वर्ष में दो बार मेले लगते थे। बैशाख की अक्षया तृृतीया, ज्येष्ठ में गंगा स्नान के समय लगने वाले मेले में कस्बा व दूरदराज से आने वाले ग्रामीण पूजा अर्चना के बाद गंगा मैय्या की तरह स्नान करते थे। उनके पिताजी का कहना है कि पूजा अर्चना के बाद स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के सभी शारीरिक, गठिया व चर्म रोग ठीक हो जाते थे। पूजनीय व निर्मल हरनंदी आज मैली हो गई है। निर्मल जल अब जहरीला पानी हो गया है।
सभी सब्जियां हो रही हैं जहरीली
गांव मोहम्मदपुर निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख विनोद मलिक का कहना है कि हिंडन नदी का पानी जहरीला होने के कारण उसके किनारे पर उगने वाली सब्जियां जहरीली हो गई हैं। गाजर, मूली, शलजम व आलू आदि में गलन व सड़न हो जाती है। इसके किनारे खेती करने वाले किसान फसलों की सिचाई में हिंडन के पानी का प्रयोग करते हैं। इस पानी से सिंचित होने वाली सभी फसलें, सब्जी व अनाज आदि का प्रयोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को बुलावा देता है।
बीमारियों को बुलावा दे रहा है नदी का पानी
गांव बवाना निवासी युवा जिला पंचायत सदस्य गज्जू पठान का कहना है कि बचपन में हम अपने माता-पिता के साथ इस नदी के पानी में स्नान करते थे। खेतों में काम करते समय प्यास लगने पर इसका पानी पीते थे। देखते ही देखते पवित्र हरनंदी में औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी आने से वह आज गंदे नाले में तब्दील हो गई है। नदी किनारे बसे गांव वालों के लिए चिंता का विषय है।
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